लुधियाना दशहरा मेला विवाद में सियासी घमासान:गुरदेव शर्मा देबी की विधायक पप्पी को सीधी चुनौती 2027 में हारे तो छोड़ दूंगा राजनीति

लुधियाना शहर का ऐतिहासिक दशहरा मेला इस बार सियासी अखाड़े में तब्दील हो गया है।भारतीय जनता पार्टी के लुधियाना सेंट्रल प्रभारी और पंजाब कोषाध्यक्ष गुरदेव शर्मा देबी ने आम आदमी पार्टी के विधायक अशोक पराशर (पप्पी) पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए सीधी चुनौती दी है। देबी ने ऐलान किया है। 2027 में अगर अशोक पराशर पप्पी मुझे हरा दिया तो मैं राजनीति छोड़ दूँगा और वह भी मुझसे वादा करें कि अगर वह हारे तो वे राजनीति छोड़ देंगए।
यह पूरा विवाद शहर के प्रसिद्ध दशहरा मेले को लेकर शुरू हुआ। भाजपा नेता गुरदेव शर्मा देबी ने विधायक पप्पी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने मेले के ठेकेदार से मोटी रिश्वत की मांग की, जिसके चलते ठेकेदार को न केवल मेला बंद करना पड़ा, बल्कि उसने मानसिक तनाव में आत्महत्या करने का भी प्रयास किया। देबी ने कहा कि इस घटना से न केवल हिंदू समाज, बल्कि पूरे पंजाबी सनातन समाज की आस्था को गहरी ठेस पहुंची है। विजीलैंस के नाम पर धमकी का आरोप
गुरदेव शर्मा देबी ने आरोप लगाया कि विधायक पप्पी विजीलैंस और मानहानि के मुकदमों की धमकियां देकर हिंदू समाज और भाजपा कार्यकर्ताओं को डराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा असल सच यह है कि विधायक की रिश्वत की मांग के कारण दशहरा मेला बंद हुआ और भगवान राम की डोली घंटों तक सड़क पर खड़ी रही। देबी ने इसे सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों पर हमला बताया।
चहेतों को ठेके गरीबों पर आपत्ति
देबी ने पिछले दो वर्षों के ठेकों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “पिछले दो सालों में जब ठेके उनके चहेतों को दिए गए, तब मेले में लगी दुकानों पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई। लेकिन इस बार जब गरीब लोग अपनी रोजी-रोटी के लिए दुकानें लगाकर बैठे, तो वे विधायक की आँखों में चुभने लगे।” उन्होंने कहा कि यह आम आदमी पार्टी के ‘आम आदमी’ प्रेम के दोहरे चरित्र को उजागर करता है।
इस मामले ने लुधियाना की राजनीति में भूचाल ला दिया है। एक तरफ जहां भाजपा इसे भ्रष्टाचार और धार्मिक भावनाओं को आहत करने का मुद्दा बना रही है, वहीं आम आदमी पार्टी के विधायक अशोक पराशर पप्पी ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद और अपनी छवि खराब करने की एक राजनीतिक साजिश करार दिया है। आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और गहराने की उम्मीद है, जिसकी असली परीक्षा 2027 के चुनावी मैदान में होगी।

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