लुधियाना के सिविल अस्पताल से मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। एक पिता की बेरुखी ऐसी कि उसने अपने ही कलेजे के टुकड़े को मनहूस कहा कर मोर्चरी में सड़ने के लिए छोड़ दिया। करीब एक महीने तक मासूम का शव अपनों के इंतजार में मोर्चरी में पड़ा रहा।पुलिस की जाँच के बाद बच्चे के दादा-दादी सामने आए और दो दिन पहले नम आंखों से मासूम का अंतिम संस्कार किया। क्या था पूरा मामला मामले की जानकारी देते हुए अस्पताल के डॉ. रोहित ने बताया कि करीब एक महीने पहले ममता नाम की महिला को डिलीवरी के लिए भर्ती कराया गया था। प्रसव के दौरान महिला की मृत्यु हो गई लेकिन बच्चा सुरक्षित था। हालांकि कुदरत को कुछ और ही मंजूर था और अगले ही दिन नवजात ने भी दम तोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शियों और अस्पताल स्टाफ के मुताबिक जब पिता को पत्नी और बच्चे की मौत की सूचना दी गई तो उसने बच्चे को अपनी पत्नी की मौत का जिम्मेदार मानते हुए उसे मनहूस कह दिया। और भी भला बुरा कह वह अपनी पत्नी का शव तो ले गया लेकिन मासूम बेटे को वहीं लावारिस छोड़ गया। 30 दिनों तक मोर्चरी में अपनों का इंतजार पिता द्वारा ठुकराए जाने के बाद बच्चे के शव को सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी। फोकल प्वाइंट पुलिस ने वारिसों की तलाश शुरू की। एक महीने की कड़ी मशक्कत और जांच के बाद पुलिस बच्चे के दादा-दादी तक पहुंचने में कामयाब रही। पुलिस की कोशिशों से मिला सम्मानजनक विदाई जब दादा-दादी को इस बात का पता चला तो वे अस्पताल पहुंचे। बच्चे की हालत देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। पुलिस की मौजूदगी में दादा-दादी ने बच्चे के शव को लिया और उसकी अंतिम रस्में पूरी कीं। डॉक्टर की जुबानी यह बेहद दुखद था। बच्चा स्वस्थ पैदा हुआ था लेकिन अगले दिन उसकी मौत हो गई। पिता का व्यवहार समझ से परे था। पुलिस ने लगातार फॉलोअप किया जिसके बाद आज इस मासूम को सम्मानजनक विदाई मिल सकी।डॉ. रोहित सिविल अस्पताल


