पंजाब के बरनाला-संगरूर जिले की सीमा पर स्थित गांव रणीके में महाशिवरात्रि का विशेष मेला शुरू हो गया है। यह मेला टेक्सटाइल कंपनी ट्राइडेंट की ओर से आयोजित किया जाता है। 400 साल से ज्यादा पुराने श्री रण-केश्वर महादेव मंदिर में दो दिवसीय यह मेला मंगलवार से शुरू हुआ है। ऐसा माना जाता है कि यहां आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। मेले में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं ट्राइडेंट के संस्थापक पद्मश्री राजिंदर गुप्ता प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी 13 किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर पहुंचेंगे। वे मंगलवार की देर शाम को भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। उनकी अगुआई में लगने वाले इस मेले में दो दिनों के दौरान लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। रण-केश्वर मंदिर का ऐतिहासिक महत्व रण-केश्वर मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी है। यह वही स्थान है, जहां महाभारत काल में कौरवों द्वारा पांडवों को सूई की नोक जितनी जगह देने से इनकार करने के बाद युद्ध की योजना बनाई गई थी। पांडवों ने यहीं सात अक्षौहिणी सेना एकत्र की थी। ऐसे पड़ा मंदिर का नाम इसी स्थान पर पांडवों ने श्री कृष्ण के साथ भगवान शिव की पूजा की थी। अर्जुन ने यहां कठोर तपस्या की थी। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें गांडीव धनुष प्रदान किया था। इसी कारण इस मंदिर का नाम रण-केश्वर महादेव पड़ा। 400 साल पुराना है मंदिर बताया जाता है कि लगभग 400 वर्ष पूर्व पटियाला के राजा नैनूमल ने इस स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। समय के साथ-साथ अनेक तपस्वियों ने यहां पर तपस्या की है। यहां पर स्थित कुएं में तपस्वी इलायची गिरी महाराज दूधा हारी थे, जिन्होंने पैदल यात्रा करके 360 तीर्थों का जल भी डलवाया था। यह स्थल आज भी श्रद्धा का कारण बना हुआ है। हर वर्ष महाशिवरात्रि पर यहां भव्य आयोजन होता है। सीएम समेत मंत्रियों के पहुंचने का अनुमान महाशिवरात्रि मेले में पंजाब से ही नहीं बल्कि दिल्ली, हिमाचल, हरियाणा, चंडीगढ और राजस्थान से लाखों भक्त पहुचेंगे। जहां पुलिस ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। बुधवार महाशिवरात्रि पर पंजाब के सीएम भगवंत मान समेत अन्य मंत्री व विधायकों के पहुंचने का अनुमान है। पिछले साल मंदिर में सीएम समेत राज्यसभा सदस्य राघव चड्डा भी पहुंचे थे।


