पंजाब के लुधियाना में ससराली कालोनी और गढ़ी फाजल गांव में सतलुज नदी का जलस्तर भले ही थोड़ा घटा हो, लेकिन गढ़ी फाजल का धुस्सी बांध कमजोर और क्षतिग्रस्त हो रहा है। रविवार को बांध के कुछ हिस्सों में दरारें और क्षति पाई गईं। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि गढ़ी फाजल और ससराली में बांध की सुरक्षा के लिए लगाए गए पत्थर और क्रेट भी थोड़े बहुत प्रभावित हुए हैं, जिससे समय पर मरम्मत न होने पर और कटाव का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय ग्रामीणों और किसानों ने जिला प्रशासन से बांध को मजबूत करने के लिए तुरंत कदम उठाने की अपील की है। स्थानीय किसान अमरीक सिंह ने कहा कि जलस्तर अभी कम हुआ है, लेकिन खतरा टला नहीं है। बांध अब मजबूत नहीं है। इसमें दरारें आ गई हैं और कुछ हिस्से बह गए हैं। अगर फिर से बारिश हुई या जलस्तर अचानक बढ़ा, तो बांध टिक नहीं पाएगा। आपातकालीन टीमें कर रही स्थिति का आकलन ड्रेनेज विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बांध की सुरक्षा के लिए लगाए गए पत्थर भारी जलधारा के कारण खिसक गए हैं। हालांकि, आपातकालीन टीमों ने स्थिति का आकलन किया है, लेकिन अभी तक पूरी मरम्मत नहीं की गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पिछले सप्ताह सतलुज के जलस्तर में वृद्धि के कारण गढ़ी फाजल के धुस्सी बांध पर दबाव पड़ा। हमने मामूली क्षति देखी है और उच्च अधिकारियों को सूचित किया है। विभाग द्वारा ताजा पत्थरों और बालू की बोरियों से मरम्मत का कार्य किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक गढ़ी फजल की स्थिति गंभीर हो गई थी, लेकिन बाद में बांध को सहारा देने के लिए अतिरिक्त क्रेट लगाए गए। दोनों बांधों पर सैकड़ों मजदूर और यूथ काम कर रहे हैं स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बांध की पूरी मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक वे सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे। गढ़ी फाजल की निवासी बलजीत कौर ने कहा कि यह बांध हमारे गांव और बाढ़ के पानी के बीच एकमात्र ढाल है। डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन बोले… डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने मत्तेवाड़ा के पास गढ़ी फाजल में धुस्सी बांध के चल रहे मरम्मत कार्य का निरीक्षण किया। उनके साथ सहायक आयुक्त डॉ. प्रगति रानी, एसडीएम जसलीन कौर भुल्लर और अन्य अधिकारी मौजूद थे। डीसी जैन ने कहा कि हमारी टीम ने ग्रामीणों के अमूल्य सहयोग से स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि बांध की मरम्मत का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा ताकि किसी भी संभावित बारिश से पहले इसे मजबूत किया जा सके।


