लुधियाना में सतलुज ने बदला रास्ता,ससराली के खेत तबाह:खतरे में टेंपरेरी बांध, ग्रामीणों में रोष 300 एकड़ से ज्यादा बह चुकी जमीन

पंजाब के लुधियाना में सतलुज दरिया ने अपना रास्ता बदल लिया है। जिस जगह पहले दरिया बहता था वहां अब पानी की रफ्तार ना के बराबर है लेकिन जिस जगह पहले खेत थे वहां अब पानी ही पानी है। ससराली कालोनी में हालात नाजुक बन गए है। बेशक सतलुज दरिया का पानी नीचे बह रहा है लेकिन पानी का बहाव इतना तेज है कि अभी तक 300 एकड़ से अधिक खेतों में कटाव डाल चुका है। दरिया में रोजाना किसानों के खेत लगातार बह रहे है। जिला प्रशासन किसानों की इस समस्या की तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा। आसपास के गांवों के लोगों ने ससराली कालोनी में धरना लगा दिया है। उनका कहना है कि यदि जल्द पत्थरों की ठोकरें लगाकर कटाव को नहीं रोका गया तो यह पानी टेंपरेरी बांध तक पहुंच जाएगा। भारतीय किसान मजदूर यूनियन के प्रधान दिलबाग सिंह गिल भी कई बार बांध पर मौका देखने जा चुके है। उन्होंने कहा कि पहले सतलुज का पानी बांध के अंदर 13 -14 एकड़ जमीन अपने साथ बहाकर ले गया। अब बांध के बाहर भी रोज जमीन को निगल रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों का कुछ भी नुक्सान हुआ तो जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। एक व्यक्ति ने कहा कि उनकी कोठी से पानी की दूरी महज 20-25 फुट दूर रह गई है। कोठी की तरफ जाने के लिए पंचायत ने ईंटों का रास्ता बनाया था, जो पानी में बहता जा रहा है। कटाव को रोका न गया तो पानी उसकी कोठी तक पहुंचकर उसे भी बहा ले जाएगा। उधर, गांव के लोगों ने बताया कि पिछले हफ्ते इस संबंध में डीसी से मिलकर भी गुहार लगा चुके हैं। इसमें मांग की गई थी कि यहां पर जाल बांधकर पत्थर के जरिए पानी को रोक लगाई जाए। इसके अलावा पोकलेन मशीन से पानी के बहाव को मोड़ा जाए। पंजाब के बाकी हिस्सों से अलग है ससराली की समस्या गांववासियों के मुताबिक ससराली की स्थिति बाकी पंजाब से अलग है। पंजाब के दूसरे हिस्सों में पानी सतलुज से बाहर आ गया और नुक्सान पहुंचाया। ससराली में पानी जमीन के लेवल से नीचे है, लेकिन वह अंदर से ही कटाव करता हुआ गांव की तरफ बढ रहा है। इसी तरह कटाव होता रहा तो पानी टेंपरेरी बांध तक भी पहुंच जाएगा। लोगों ने मांग की है कि जाल बांधकर उसमें पत्थर डालकर स्टड बनाए जाएं, ताकि कटाव को रोका जा सके।
गांव बूथगढ़ के पूर्व सरपंच बलदेव सिंह ने कहा कि सतलुज के किनारे पत्थर लाकर रखे हुए हैं, लेकिन इन्हें जाल बनाकर बांधा नहीं गया। इस वजह से डेढ़ से दो किलोमीटर में दो ढाई एकड़ जमीन रोज सतलुज निगल रही है। कोठी से महज 20-25 फुट रह गई पानी की दूरी
ससराली में लोगों की जमीनें सतलुज में बहने की सूचना मिलने पर फतेहगढ़ साहिब से लोकसभा सांसद डॉ.अमर सिंह ससराली कलां पहुंचे थे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और गांववालों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने गांववासियों के सामने ही स्पीकर फोन ऑन कर ही डीसी हिमांशु जैन को फोन कर लिया। उन्होंने कहा कि कटाव को रोकने के लिए जाल बांधकर उसे मशीन की मदद से सतलुज की गहराई तक पहुंचाया जाए ताकि वह पानी के बहाव में टिक सकें। डीसी ने कहा कि वह एसई व एक्सईएन को 20 लाख रुपए ट्रांसफर कर देते हैं। इस पर सांसद ने कहा कि वह भी अपनी तरफ से 20 से लेकर 40 लाख रुपए देने के लिए राजी हैं, लेकिन ससराली गांव को बचाना है। डीसी ने कहा कि फंड की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

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