पंजाब के लुधियाना में चाइना डोर की बिक्री और होम डिलीवरी पर पुलिस रोक लगाने में पूरी तरह से फेल साबित हुई है। दो ताजा मामले सामने आ चुके हैं। पहला मामला समराला का है, जहां 15 वर्षीय स्टूडेंट के गले में चाइना डोर लिपट गई जिसने किशोर की जान ले ली। इसी तरह दूसरी मामला मुल्लापुर का सामने आया है। महिला खरीददारी करने बाजार गई, वहां चाइना डोर ने उसका गला रेत दिया। इन दोनों मामले में पुलिस ने अज्ञात पर मामला तो दर्ज कर दिया, लेकिन अब देखना यह है कि क्या मरने वालों के परिवारों को इंसाफ मिल पाएगा। हम यह सवाल इसलिए कर रहे है कि 6 वर्षीय दक्ष की 15 अगस्त 2022 को चाइना डोर से कटकर मौत हो गई थी। आज तक दक्ष का पिता थाने और कोर्ट के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसे इंसाफ नहीं मिल रहा। थाना, पटवारी के चक्कर लगाकर वह इतना परेशान हो गया है कि उसकी पत्नी तक सदमे में चली गई है। पत्नी की मानसिक हालत ठीक ना होने के कारण दक्ष के पिता ध्रुव गिरी ने इंसाफ की उम्मीद अब प्रशासन से छोड़ दी है। दैनिक भास्कर एप से विशेष बातचीत करते हुए ध्रुव गिरी ने अपने बेटे की मौत और अभी तक कितनी संघर्ष उसने इंसाफ दिलवाने के लिए किया वह साझा किया। अब पढ़िए, धुव्र गिरी से हुई बातचीत बच्चे के पिता ध्रव गिरी ने बताया कि, मैं 15 अगस्त 2022 को गिल रोड से अपने बेटे दक्ष के साथ स्कूटर पर घर आ रहा था। तभी अचानक चाइना डोर मेरे बेटे के गले से लिपट गई। किसी तरह मैंने स्कूटर रोकने की कोशिश की, लेकिन तब तक मेरे बेटे के गले से काफी खून बह गया। मुझे भी काफी चोटें आई। किसी तरह राहगीरों ने मेरे बेटे को ग्रेवाल अस्पताल पहुंचाया। हालत गंभीर देख उसे डीएमसी भेजा गया, लेकिन बेटे की मौत हो गई। बेटे की मौत ने मुझे अंदर तक हिला दिया। चाइना डोर देखते ही कांप जाती है रुह : ध्रुव उन्होंने कहा कि, आज जब भी किसी के हाथ में चाइना डोर देखता हूं या आसमान पर पतंग के साथ चाइना की डोर बंधी देखता हूं तो मेरी रुह कांप जाती है। मुझे इस चाइना डोर से डर लगने लगा है। इस चाइना डोर ने मेरे से मेरा बेटा छिन लिया। अभी पिछले दो दिनों में एक 15 वर्षीय किशोर तरणजोत सिंह की गला चाइना डोर से कटने के कारण मौत हो गई। इसी तरह मुल्लापुर में महिला सरबजीत कौर नाम की महिला का गला चाइना डोर ने रेत दिया। प्रशासन खामोश है और लोगों के घर उजड़ रहे हैं। पुलिस और सरकार से मिले सिर्फ झूठे आश्वासन जब मेरे बेटे की मौत हुई थी तो उस समय मैं किसी तरह की FIR दर्ज करवानी नही था, चाहता और ना ही मैं अपने बेटे का पोस्टमॉर्टम करवाना चाहता था। उस समय पुलिस अधिकारियों ने कहा था कि मामला दर्ज करवाना जरूरी है तभी कार्रवाई होगी। सरकार से मुआवजा तभी मिलेगा जब पोस्टमॉर्टम होगा। लेकिन उस समय पुलिस का ये झूठे आश्वसनों में आकर मैंने उनकी हर एक बात मान ली। जिस थाना में उस समय मामला दर्ज करवाया था, अब उसी थाना से कई बार फोन आ चुका है कि उस समय जो FIR दर्ज करवाई थी उसे रफा-दफा करवा दो। इस मामले में पुलिस ने कोई आरोपी नहीं पकड़ा और ना ही कोई मुआवजा मुझे दिलवाया। सरकार से मुझे सिर्फ 1 लाख रुपए मिला है। क्या एक बच्चे की जिंदगी की कीमत 1 लाख है। मेरी पत्नी बेटे की मौत के बाद अपनी मानसिक हालत खराब कर चुकी है। पटवारी खिला रहा धक्के उन्होंने कहा कि, पुलिस बेशक रेड करके चाइना डोर के गट्टू पकड़ने की बात कहती है, लेकिन ये डोर कहीं बाहर से नहीं बल्कि लुधियाना में ही बनती है। पुलिस को इनके ठिकाने खोजने चाहिए। मैं पिछले 3 महीने से गिल हलके पटवारी के चक्कर लगा रहा हूं। मेरे मुआवजे की फाइल उनके पास है लेकिन मुझे सिर्फ धक्के खिलाए जा रहे है। इंसाफ कही नहीं मिल रहा। सरकार से मांग है कि मुआवजा दिया जाए और चाइना डोर पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाए।


