पंजाब के लुधियाना में साइबर जालसाजों ने 69 वर्षीय सेवानिवृत्त ONGC अधिकारी को निशाना बनाया और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए स्मार्ट हेल्थ कार्ड जारी करने के बहाने उनके संयुक्त बैंक खाते से 14.96 लाख रुपए उड़ा लिए। यह घोटाला एक ऑनलाइन फॉर्म और फर्जी बैंक ट्रांसफर के जरिए अंजाम दिया गया। पीड़ित राजेंद्र सिंह, शहरी एस्टेट, दुगरी के फेज-2 के निवासी ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद अज्ञात जालसाजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। ONGC के मुंबई कार्यालय की डीलिंग शाखा के पूर्व महाप्रबंधक सिंह ने बताया कि यह घटना कैसे हुई। 7 जनवरी को आई ठगों की काल
7 जनवरी को उन्हें एक फोन कॉल आया जो अचानक डिस्कनेक्ट हो गया। कुछ ही देर बाद उन्हें एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को कुलदीप श्रीवास्तव बताते हुए ONGC की देहरादून शाखा के सेवानिवृत्त कर्मचारी सेल का प्रतिनिधि होने का दावा किया। जालसाज ने सिंह को सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक नए स्मार्ट हेल्थ कार्ड के बारे में बताया और उन्हें सेवा का लाभ उठाने के लिए एक ऑनलाइन फॉर्म भरने और 10 रुपये का भुगतान करने के लिए कहा।
राजेन्द्र सिंह ने कहा कि मैंने फॉर्म भरा और अपनी पत्नी के साथ सांझा किए गए संयुक्त खाते से 10 रुपए का भुगतान किया। कुछ ही देर बाद मुझे एहसास हुआ कि कॉल धोखाधड़ी वाली हो सकती है, क्योंकि फॉर्म में मेरे बैंक विवरण भी मांगे गए थे। घबराकर वह अपने बैंक पहुंचे और फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (एफडीआर) बनाकर खाते में मौजूद 19.5 लाख रुपए सुरक्षित करने की कोशिश की। बैंक ने उन्हें आश्वासन दिया कि पैसा सुरक्षित है। खाते से से निकले 14.93 लाख रुपए हालांकि, अगली सुबह सिंह को सूचना मिली कि उनके खाते से 14.93 लाख रुपए निकाल लिए गए हैं। जालसाजों ने 4.95 लाख रुपये और ट्रांसफर करने का प्रयास किया, लेकिन बैंक ने सफलतापूर्वक लेनदेन को रोक दिया। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के SHO इंस्पेक्टर जतिंदर सिंह ने पुष्टि की कि बीएनएस की धारा 319(2) (पहचान करके धोखाधड़ी के लिए सजा) और 318(4) (धोखाधड़ी) के तहत एक एफआईआर दर्ज की गई है। जांचकर्ता उन खातों का पता लगा रहे हैं, जहां चोरी की गई रकम ट्रांसफर की गई थी, ताकि अपराधियों की पहचान की जा सके।


