लेडीज के लिए चले स्पेशल बीआरटीएस बसें, ताकि कॉलेज-ऑफिस जाने में न खाने पड़ें ऑटो के धक्के

अमृतसर| लोगों की सुविधाओं के िलए सिटी के अंदर 14 महीने से बंद पड़ी बीआरटीएस बसें फिर से शुरू की गई हैं। हालांकि अभी यह ट्रायल के तौर पर करीब 30 दिन तक चलाने को कहा गया है। लेकिन केवल 5 बसें ही चलाई गई हैं। महिलाओं का कहना है कि इतने बड़े शहर में 5 बसें पर्याप्त नहीं हैं। महिलाओं के लिए बसें आरक्षित होनी चाहिए। बसें न होने के कारण उन्हें ऑटो चालकों को मुंह मांगा किराया देना पड़ रहा है। स्पेशल ऑटो करने पर 5 किलोमीटर के ही ऑटो चालक 80 रुपए मांग लेते हैं। कई इलाके तो ऐसे हैं जहां ऑटो भी नहीं जाते। ऐसे एरिया को बसों द्वारा कवर किया जाना चाहिए। मंत्री ने इन 5 बसों में 21 दिन तक किराया न देने की घोषणा भी की थी। फिलहाल केवल यह बसें गेट-वे टू इंडिया से गोल्डन गेट तक शुरू की गई हैं। इसका भी समय निर्धारित िकया गया है जोकि सुबह 9 से 6 बजे तक है। इन बसों के िलए भी महिलाओं को 15-20 मिनट का इंतजार करना पड़ रहा है। 2016 में को 650 करोड़ की लागत से रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद 14 महीने सभी बसें बंद हो गई थी। अब 30 दिन के बाद इन बसों की संख्या तो 93 हो जाएगी। लेकिन महिलाओं के िलए बसें आरक्षित नहीं होगी। यदि पूरे शहर में महिलाओं के लिए अलग बसें हो ताकि सुबह स्कूल कालेज और ऑफिसों में जाने वाली फीमेल को बहुत फायदा होगा। शहर में कहीं भी जाना हो ऑटो से जाना पड़ता है। कमर दर्द या अन्य रोगों से पीड़ितों के लिए ऑटो से जाने में समस्या आती है। जब सरकार पूरे पंजाब में बसें निशुल्क चला सकती है तो सिटी के अंदर भी महिलाओं के िलए निशुल्क व्यवस्था होनी चाहिए। -हरविंदर कौर, वार्ड नंबर 55 ^रोजाना सुबह छात्राओं को स्कूल, कालेज और ऑफिसों में जाना होता है। उन्हें धक्के खाकर अपने डस्टीनेशन पर पहुंचना पड़ता है। यदि पूरे शहर में महिलाओं के लिए अलग बसें हो ताकि सुबह स्कूल कालेज और ऑफिसों में जाने वाली फीमेल को बहुत फायदा होगा। इतना ही नहीं इससे बच्चियों के पेरेंट्स भी बेटियों की ओर से बेचिंत रहेंगे। -मंजीत कौर, वार्ड नंबर 51 ^ बसों की व्यवस्था शहर में होना बहुत जरूरी है। इसके लिए महिलाओं की ओर से नहीं उठाई जानी चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए नगर निगम को खुद महिलाओं के लिए आरक्षित बसें चलानी चाहिए। दूसरी बसों में उन्हें कई बार भीड़ में जगह नहीं मिल पाती। महिलाओं की अलग बस होगी तो वह सहज महसूस करेंगी। -रितु, वार्ड नंबर 77

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *