भास्कर न्यूज|लुधियाना भारतीय किसान यूनियन पंजाब की मासिक बैठक में लैंड पूलिंग नीति का विरोध किया गया। इस दौरान किसानों के हितों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सरकार के रवैये पर आक्रोश जताया गया। किसानों ने लैंड पूलिंग नीति और अमेरिका के साथ संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के खिलाफ एकजुट होकर मोर्चा खोल। वीरवार को आयोजित मीटिंग के दौरान भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रधान हरिंदर सिंह लखोवाल और सरपरस्त अवतार सिंह महलों ने पंजाब सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि लैंड पूलिंग नीति किसानों की बर्बादी का कारण बन रही है। उन्होंने सरकार को चेताया कि यदि जल्द से जल्द इस नीति का नोटिफिकेशन रद्द नहीं किया गया, तो इसके खिलाफ व्यापक संघर्ष छेड़ा जाएगा और किसी भी कीमत पर लैंड पूलिंग नहीं होने दी जाएगी। लखोवाल ने सवाल उठाया कि पिछले 20 वर्षों में जिन कॉलोनियों को काटा गया है, उनका विकास आज तक अधूरा है। जब पहले से मौजूद प्लॉट नहीं बिक रहे, तो हजारों एकड़ नई जमीन कैसे बिकेगी? उन्होंने मांग की कि सरकार खेतीबाड़ी की जमीन से छेड़छाड़ न करते हुए प्रोजेक्ट बेआबाद जमीन पर शुरू करे और किसानों को मुआवजा या जमीन के बदले जमीन दी जाए। परशोत्तम सिंह गिल और हरमंदर सिंह खेरा ने अमेरिका के साथ संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को खतरनाक बताते हुए कहा कि इससे देश का खेती और डेयरी सेक्टर पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा और बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों के कब्जे में चला जाएगा, जिससे आम किसान का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। परमिंदर सिंह पालमाजरा और निर्मल सिंह ने नहरों में पानी की कमी और गन्ने की सब्सिडी के भुगतान में देरी को लेकर सरकार की उदासीनता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बिजाई का समय खत्म हो रहा है और किसान परेशान हैं। सरकार तुरंत गन्ने की 61 रुपए प्रति क्विंटल की सब्सिडी किसानों के खातों में डाले। सिमरनजीत सिंह और बलदेव सिंह पुनिया ने राज्य में भैंसों की घटती संख्या और नकली दूध की कालाबाजारी पर चिंता जताई। उन्होंने सरकार से मांग की कि नकली दूध के कारोबार पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसान डेयरी व्यवसाय से विमुख न हों। बैठक में आवारा पशुओं से होने वाले एक्सीडेंट और पेड़ों को नुकसान की घटनाओं पर भी चिंता जताई गई और सरकार से इस पर तुरंत एक्शन लेने की मांग की गई।


