राजस्थान में लैब टेक्नीशियन की ग्रेड पे बढ़ाने की मांग एक बार फिर उठी है। अखिल राजस्थान लैबोरेट्री टेक्नीशियन कर्मचारी संघ ने जिला कलेक्टर के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री को पांच सूत्रीय मांगपत्र भेजा है। संघ के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुमार शाक्य ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में संक्रमण जांचों का भार लगातार बढ़ रहा है। राजस्थान में लैब टेक्नीशियन को 2800 ग्रेड पे मिल रही है। जबकि हरियाणा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कम योग्यता के बावजूद 4200 ग्रेड पे दी जा रही है। राज्य में लैब टेक्नीशियन के लिए 17 साल पुराना स्टाफिंग पैटर्न लागू है। इस दौरान जांच कार्य 8 से 10 गुना बढ़ चुका है। पुराने स्टाफिंग पैटर्न के कारण पदोन्नति और नई भर्तियां प्रभावित हो रही हैं। संघ के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राजविन्द्र सिंह ने उच्च प्रशिक्षण की मांग की है। उन्होंने कहा कि एमएससी एमएलटी और पीएचडी एमएलटी कोर्स शुरू किए जाएं। इसके लिए 50 प्रतिशत कोटा स्टडी लीव के साथ रिजर्व किया जाए। साथ ही बीएससी एमएलटी और एमएससी एमएलटी को 70 प्रतिशत पदों पर असिस्टेंट प्रोफेसर और लेक्चरर के रूप में नियुक्ति दी जाए। प्रदेश संयोजक राजेन्द्र स्वामी ने कहा कि वर्तमान में पदोन्नति के पर्याप्त पद नहीं होने के कारण संवर्ग के कार्मिकों को डीपीसी का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। संवर्ग के प्रमोशन चैनल को चिकित्सा विभाग में ही चिकित्सकों के डीएसीपी की तरह सुनिश्चित कराते हुए समयबद्ध पदोन्नति सुनिश्चित की जाए। लैब टेक्नीशियन की वरीयता सूची जारी कर वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन, तकनीकी सहायक और वरिष्ठ तकनीकी सहायक के पदों की पदोन्नति अति शीघ्र की जाए ताकि राज्य सरकार की ओर से पदोन्नति में दी गई शिथिलता का लाभ कार्मिकों को मिल सके।


