लैब रिपोर्ट में खुलासा:35 करोड़ रुपए में बनी 25 सड़कें जांच में फेल न अफसरों पर कार्रवाई हुई और न वसूली

भरतपुर-डीग जिले में सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित करीब 25 सड़कों की गुणवत्ता लैब टेस्ट में फेल हो गई है। इन सड़कों के निर्माण में इंजीनियरों और ठेकेदारों द्वारा मानकों की जमकर अनदेखी की गई। लैब रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सड़कों की मोटाई, बिटुमिन कंटेंट और सीसी कोर स्ट्रेंथ तय मानकों से कम पाई गई। भरतपुर से सौंख रोड 14.75 करोड़, एनएच-21 से अछनेरा रोड 5.63 करोड़, गोलपुरा-हीरादास बाइपास 5.11 करोड़, एआर-मुरवारा रोड 5.11 करोड़, टॉप सर्कल-अटल बंध लिंक रोड 5.23 करोड़, रोरविला-फौजदार टेंट हाउस 5.25 करोड़ और सिंघल मिल-शिवराज हाउस 5.57 करोड़ समेत सात सड़कों की गुणवत्ता खराब पाई गई। उदाहरण के तौर पर अछनेरा रोड पर बीटी पेवमेंट की मोटाई 80 मिमी होनी चाहिए थी, लेकिन यह 55 मिमी मिली। बिटुमिन कंटेंट भी तय 4.5% के बजाय 3.46%-3.64% के बीच पाया गया। उक्त सभी सड़कों का निर्माण कार्य 2023 में पूरा हो चुका है। जिसके बाद विभाग द्वारा पेमेंट भी कर दिया गया है। लेकिन अब गुणवत्ता में कमी की पुष्टि के बाद पीडब्ल्यूडी के अतिरिक्त मुख्य अभियंता ने दोषी इंजीनियरों पर कार्रवाई और ठेकेदारों से वसूली के आदेश जारी किए। पिछले साल 27 नवंबर को वसूली के लिए नोटिस दिया गया था, जिसे 15 दिनों में वसूली की जानी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस मामले में विभागीय अधिकारियों की चुप्पी सवालों के घेरे में है। पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से सरकारी धन की बर्बादी और सड़कों की खराब स्थिति जनता की सुरक्षा पर बड़ा खतरा है। पीडब्ल्यूडी की 35 करोड़ की सड़कों की मोटाई जांच में फेल, मानकों की अनदेखी सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा 35 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई उक्त सभी सड़कों की गुणवत्ता जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार भरतपुर-सौंक रोड की मोटाई तय मानकों से काफी कम पाई गई है, जिससे निर्माण में लापरवाही उजागर हुई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, सड़कों की BT पेवमेंट की कुल मोटाई 100 मिमी (डीबीएम=60 मिमी, बीसी= 40 मिमी) होनी चाहिए थी, लेकिन विभिन्न स्थानों पर यह 70 से 90 मिमी के बीच रही। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि DBM की मोटाई 40-55 मिमी के बीच रही, जबकि बीसी की मोटाई 25-35 मिमी तक सीमित है। तीन जिम्मेदार इंजीनियरों से भास्कर का एक सवाल; इन पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? “मेरा काम सड़कों की जांच कर रिपोर्ट देना है। कार्रवाई अति. मुख्य अभियंता करेंगे।”
– जसवंत लाल खत्री, मुख्य अभियंता क्वालिटी कंट्रोल जयपुर- “रिपोर्ट के आधार पर मैने संबंधित इंजीनियरों व ठेकेदारों पर कार्रवाई के लिए एससीई को आदेश दिया है। कार्रवाई एसई करेंगे।”
-सुरेंद्र कुमार, अति. मुख्य अभियंता “मैने सभी इंजीनियरों को कारण बताओ का नोटिस दिया है। जवाब आने के बाद कार्रवाई करेंगे। ठेकेदारों को भी नोटिस दिया गया है। वे सड़कों का रिकंस्ट्रक्शन करेंगे नहीं तो उनसे रिकवरी की जाएगी।”
-आरसी मीणा ,एसई एनएच-21 से अछनेरा सड़क निर्माण में बिटुमिन कंटेंट जांच में फेल, तय मानकों से कम गुणवत्ता पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाई गई सड़कों में निर्धारित मात्रा के अनुसार मेटेरियल का उपयोग नहीं किया गया है। गुणवत्ता की भारी अनदेखी उजागर हुई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार सड़कों के निर्माण में बिटुमिन कंटेंट तय मानकों से काफी कम पाया गया। जांच रिपोर्ट में DBM(सघन बिटुमिन मैकाडम) और BC (बिटुमिनस कंक्रीट) के बिटुमिन कंटेंट का उपयोग भी निर्धारित मानकों से कम की गई है। पीडब्ल्यूडी के इन भ्रष्ट इंजीनियरों पर कार्रवाई के लिए मिला नोटिस भरतपुर के अधिशासी अभियंता ओमप्रकाश किराड़, डीग के अधिशासी अभियंता रूपेश कुमार, कुम्हेर के सहायक अभियंता दीपू सिंह, धीरज सिंह (कनिष्ठ अभियंता, भरतपुर), पुष्पेंद्र पाल सिंह (कनिष्ठ अभियंता), और सोरन सिंह (कनिष्ठ अभियंता) शामिल हैं।

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