लॉरेंस की आतंकी गैंग का सरगना, पाकिस्तान से मंगवाता हथियार:फायरमैन और बाल काटने वाले को गैंग से जोड़ा, नेपाल के रास्ते विदेश भागा

लॉरेंस की आतंकी गैंग के लिए पाकिस्तान से खतरनाक हथियार-ड्रग्स मंगवाने वाला मास्टरमाइंड श्रीगंगानगर का विशाल पचार है। ये नाम हाल ही में NIA की एक चार्जशीट में पहली बार सामने आया था। भास्कर ने NIA की चार्जशीट के साथ-साथ विशाल की क्राइम कुंडली खंगाली तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। विशाल ने 13 साल की उम्र में पहला क्राइम किया। एक-एक कर 11 वारदातों में उसका नाम आया। डेढ़ साल पहले नेपाल के रास्ते विदेश भाग गया। पाकिस्तान के बड़े तस्करों से उसका कनेक्शन है। उसकी गैंग पाकिस्तान से हथियारों और ड्रग्स मंगवाकर अलग-अलग लोकेशन पर छिपाकर रखती है। देशभर में बड़ी वारदात को अंजाम देने से पहले शूटरों तक उनकी डिलीवरी करती है। लॉरेंस गैंग में विशाल को एलेक्स और सरदार खान जैसे कई नाम सामने आए हैं। उसने फायरमैन से लेकर सैलून चलाने वाले और बेरोजगार युवाओं को भी इस खतरनाक काम में जोड़ रखा है। पढ़िए- ये इन्वेस्टिगेशन स्टोरी… कौन है मास्टरमाइंड विशाल पचार? विशाल पचार श्रीगंगानगर के वार्ड नंबर 14 शनि मंदिर के पास का रहने वाला है। लॉरेंस गैंग में विशाल को एलेक्स बुलाया जाता है। इसके अलावा भी उसके कई नाम हैं, जैसे- सरदार खान, एसके। विशाल के पिता इंद्राज पचार शराब के ठेके पर सेल्समैन का काम करते थे। विशाल भी वहां चला जाता था। शराब ठेके पर पंजाब और हरियाणा के कई गैंगस्टर आते थे। यहीं से उसकी दोस्ती गैंगस्टर से होने लग गई। पहली बार गंगानगर पुलिस ने विशाल को जुआ खेलते हुए 2013 में पकड़ा था। तब यह नाबालिग होने के कारण कोर्ट ने 100 रुपए का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया था। विशाल के खिलाफ धमकी देने, फिरौती मांगने के राजस्थान और पंजाब में करीब 11 मुकदमे दर्ज हैं। कुछ मामलों में चालान पेश हो चुका है। विशाल पर श्रीगंगानगर पुलिस ने 25 हजार रुपए का इनाम रखा हुआ है। इंटरपोल को भी रेड कॉर्नर नोटिस दिया जा चुका है। विदेश में बैठ कर पाकिस्तान से मंगवाता खेप विशाल ने 11 मार्च 2020 को जयपुर से पासपोर्ट नंबर यू 3101090 बनवाया। रोहित गोदारा के संपर्क से वह नेपाल के रास्ते 2024 में भारत से फरार हो गया। वहां लॉरेंस गैंग में रोहित गोदारा, वीरेंद्र चारण सहित अन्य लोगों के संपर्क में था। श्रीगंगानगर का निवासी होने के कारण विशाल को बॉर्डर से सटे इलाकों की पूरी जानकारी थी। ऐसे में रोहित गोदारा ने उसे बॉर्डर एरिया में नेटवर्क बनाने की जिम्मेदारी सौंपी। कुछ ही समय में विशाल ने पाकिस्तान में बैठे ड्रग और हथियार तस्करों से संपर्क बना लिया। वहीं, बॉर्डर से सटे छोटे-छोटे गांवों में भी अपना नेटवर्क तैयार किया। पाकिस्तान से आने वाले हथियारों की खेप ठिकाने लगाने और उनकी डिलीवरी के लिए कई युवाओं को पैसों का लालच देकर जोड़ा। सबसे पहले अपने बचपन के दोस्त देवेंद्र भांभू को गैंग में शामिल किया। देवेंद्र भांभू फायरमैन की नौकरी करता था। बॉर्डर से सटे इलाकों में उसकी अच्छी जान पहचान थी। ऐसे में दोनों ने मिलकर लॉरेंस गैंग के लिए हथियारों और ड्रग की खेप को मंगवाना शुरू कर दिया। सुनसान जगहों पर खेतों में ही पैकेट गिरा दिए जाते थे। यहां सख्ती बढ़ी तो पंजाब में पाकिस्तान बॉर्डर एरिया में अपना नेटवर्क बढ़ाया। देवेंद्र भांभू : विशाल के बचपन का दोस्त, नौकरी छोड़ बन गया बदमाश देवेंद्र भांभू (29) पुत्र चुन्नीलाल भांभू श्रीगंगानगर की वाटरवर्क्स कालोनी का रहने वाला है। देवेंद्र भांभू और विशाल पचार बचपन के अच्छे दोस्त हैं। गैंग में शामिल होने के लिए देवेंद्र ने फायरमैन की नौकरी तक छोड़ दी थी। विशाल के विदेश भागने के बाद दोनों वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम के जरिए एक दूसरे के संपर्क में रहते थे। विशाल के निर्देश पर देवेंद्र ही गैंग को हथियारों-ड्रग्स की सप्लाई का जिम्मा देखता था। राजस्थान-पंजाब से सटे बॉर्डर तक बनाई गैंग विशाल पचार और देवेंद्र भांभू ने मिलकर गैंग में कई मेंबर जोड़े। ज्यादातर बदमाश सुभाष, सतनाम, साहिल और राजन कांडे श्रीगंगानगर जिले के ही रहने वाले हैं। सुभाष : मूलत: चक 6-ए छोटी का रहने वाला है। श्रीगंगानगर में नाई की दुकान चलाता था। देवेंद्र और विशाल ने रुपए कमाने का लालच देकर गैंग में शामिल किया। कहीं भी हथियार की सप्लाई लेने के लिए सुभाष को ही भेजा जाता था। सतनाम : चक 6-A छोटी गांव का रहने वाला है। देवेंद्र, सुभाष के साथ मिलकर काम करता था। तीनों मिलकर बॉर्डर से आने वाली हथियारों और नशे की खेप को लेकर पंजाब में एक किराए के कमरे में ले जाते थे। साहिल : देवेंद्र, सुभाष और सतनाम से पूछताछ के बाद पकड़ा गया था। रावला मंडी निवासी साहिल उर्फ साहिल कुमार (24) पुत्र जुगल किशोर की तीनों से दोस्ती थी। लंबे समय से इनके संपर्क में था। पहले भी एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार हो चुका था। राजन कांडे : देवेंद्र और विशाल पचार गैंग में एक्टिव था। श्रीगंगानगर के छजगरिया मोहल्ला (अशोक नगर) का रहने वाला है। जवाहर नगर थाने में 2022 से 2023 के बीच 4 आपराधिक मामले दर्ज हैं। ग्लॉक-जिगाना जैसे फायर आर्म्स के साथ पकड़े गए तस्करों ने लिया किंगपिन का नाम
श्रीगंगानगर पुलिस को 20 मई 2025 को लारेंस गिरोह के बदमाश देवेंद्र भांभू, सुभाष उर्फ अंकित और सतनाम उर्फ गुरविंदर को पकड़ा। तलाशी में इनकी कार में 330 ग्राम हेरोइन, 4 विदेशी पिस्टल ग्लॉक, 1 जिगाना पिस्टल, 6 खाली मैगजीन, 29 जिंदा कारतूस और मोबाइल फोन बरामद हुए थे। श्रीगंगानगर पुलिस मामले में जांच कर रही थी। लेकिन इसी बीच 27 जून को गृह मंत्रालय का आदेश आया कि अब NIA मामले की जांच करेगी। गृह मंत्रालय के सचिव विमल कुमार शुक्ला ने 29 जून को रिपोर्ट दर्ज करवाई। इन्वेस्टिगेशन शुरू हुआ। करीब 4 महीने लंबी पड़ताल में सामने आया कि ये हथियार पाकिस्तान से डिलीवर हुए थे। इसका मास्टरमाइंड लॉरेंस गैंग का बदमाश विशाल पचार उर्फ एलेक्स है। NIA ने सबूत जुटाए और विशाल के खिलाफ लॉरेंस बिश्नोई की तरह आतंकी धाराओं (UAPA एक्ट) में मुकदमा दर्ज किया। 15 नवंबर 2025 को NIA कोर्ट में चार्जशीट पेश की। इस चार्जशीट में विशाल पचार के पाकिस्तान में नेटवर्क और राजस्थान-पंजाब-हरियाणा में हथियारों-ड्रग्स की सप्लाई का खुलासा हुआ। विदेश में छिपा एलेक्स, मैसेज मिलते ही काम में जुट जाती थी गैंग NIA के चार्जशीट के अनुसार पाकिस्तान से हथियार और ड्रग्स की सप्लाई का पूरा काम विशाल उर्फ एलेक्स विदेश में बैठकर अंजाम दे रहा था। बॉर्डर पर हथियार और ड्रग्स कहां पहुंचाई जाएगी? कब और किसे खेप की सप्लाई करनी है? यह सब विशाल पचार ही तय करता था। सिग्नल ऐप, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया ऐप के जरिए अपनी गैंग से कनेक्ट रहता था। पाकिस्तान से आई ड्रग और हथियार की सेफ लेंडिंग होने के बाद विशाल उर्फ एलेक्स का मैसेज मिलते ही गैंग अपने काम में जुट जाती थी। 20 मई 2025 को देवेंद्र, सुभाष और सतनाम अपनी गाड़ी में हथियार और हेरोइन लेकर एलेक्स के मैसेज का इंतजार कर रहे थे। एनआईए को देवेंद्र, सुभाष से सिग्नल ऐप और दूसरे ऐप पर चैट मिली है। इसमें विशाल ने बॉर्डर पार से आने वाले हथियारों के बारें में बता जानकारी दी थी। हथियार लेने के बाद अगला मैसेज मिलने पर डिलीवरी लेकर जाने को कहा था। गिरफ्तारी से 2 सप्ताह पहले ही पंजाब में कई जगह भेजे हथियार और ड्रग गैंग ने पंजाब के अबोहर, मलोट और अमृतसर में भी नेटवर्क बना रखा था। गैंग 20 मई को पकड़ी गई थी। इससे पहले 3-4 महीने में ही 3 बार हथियार और ड्रग सप्लाई के पुख्ता सबूत मिले हैं। शातिर गैंग : पुलिस को चकमा देने के लिए अलग-अलग शहरों में किराए के कमरे विशाल पचार गैंग बहुत शातिर है। पाकिस्तान से हथियारों और हेरोइन की डिलीवरी लेने के बाद उसे सेफ रखने के लिए उसने कई गुप्त ठिकाने बना रखे थे। हथियारों को अलग और ड्रग्स को अलग लोकेशन पर रखा जाता था। सेफ हेंडलिंग के लिए गंगानगर के नेहरा नगर, सुखाड़िया सर्कल और चक 5-ई छोटी, संगरिया बस स्टैंड के पास और सूरतगढ़ रोड पर किराए से कमरे ले रखे थे। इसी तरह पंजाब में भी कई जगह किराए पर कमरे का खुलासा हुआ है। विशाल को जिसने भारत से भेजा, कैलिफोर्निया में उसका मर्डर विशाल पचार को सुनील यादव ने 2024 में नेपाल के रास्ते भारत से फरार कराया था। सुनील यादव और विशाल की अच्छी दोस्ती थी। सुनील भी लंबे समय से भारत से बाहर था। लेकिन दिसंबर 2024 में रोहित गोदारा ने कैलिफोर्निया में उसकी हत्या करवा दी थी। इस मर्डर को लेकर तब रोहित गोदारा और विशाल पचार के बीच काफी बहस भी हुई थी। इसके बाद लॉरेंस गैंग में भी फूट पड़ गई। रोहित-गोल्डी एक तरफ और लॉरेंस और अनमोल एक तरफ हो गए। विशाल भी रोहित गोदारा से अलग होकर अपनी गैंग चलाने लगा। पकड़ने के लिए इंटरपोल की मदद ले रही पुलिस गंगानगर एसपी अमृता दुहन का कहना है की विशाल पचार के खिलाफ ₹25000 का इनाम घोषित किया गया है। इसके खिलाफ 2013 में पहला मुकदमा सामने आया था और करीब 2022 से यह लॉरेंस गैंग से जुड़ा हुआ है। विशाल पचार को पकड़ने के लिए इंटरपोल की मदद भी ली जा रही है। इसके खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी किया जा चुका है।

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