भास्कर न्यूज | लुधियाना पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने शहरी इलाकों, खासकर लुधियाना जैसे बड़े औद्योगिक शहरों में विकास कार्यों को तेज करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। स्थानीय निकाय विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना के तहत नगर निगमों में विकास कार्यों की तकनीकी स्वीकृति से जुड़े अधिकारों को स्पष्ट और समयबद्ध कर दिया गया है। इसका सीधा असर लुधियाना शहर में रुके या धीमी रफ्तार से चल रहे प्रोजेक्ट्स पर पड़ेगा। अभी तक जहां सिर्फ एक करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्टों को चंडीगढ़ स्तर पर ही मंजूरी दी जाती थी। लेकिन अब सरकार ने इन नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए 2 करोड़ रुपए तक के एस्टीमेट लोकल स्तर पर ही मंजूर करने की पावर सुपरिंटेंडेंट इंजीनियरों को सौंप दी है। इस संबंध में सरकार ने बुधवार को नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। लुधियाना में यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि 2027 के चुनाव से पहले सरकार शहर में सड़क नेटवर्क, ड्रेनेज सिस्टम, कूड़ा प्रबंधन और औद्योगिक इलाकों की बुनियादी सुविधाओं को सुधारने पर फोकस कर रही है। चुनावी साल से पहले विकास कार्य जमीन पर दिखें, इसके लिए फाइलों की लेटलतीफी खत्म करना जरूरी माना जा रहा है। इसके साथ ही तकनीकी मूल्यांकन और लागत अनुमान की जांच की प्रक्रिया भी आसान की गई है। तय किया गया है कि सभी मामलों में तकनीकी जांच और कंपरेटिव स्टेटमेंट की वेरीफिकेशन 10 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। इससे टेंडर प्रक्रिया और काम शुरू होने में लगने वाला समय घटेगा। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि नगर परिषदों और इम्प्रूवमेंट ट्रस्टों के नियमों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था से लुधियाना जैसे शहरों में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ेगी और इसका राजनीतिक असर भी 2027 के चुनाव में देखने को मिल सकता है। नगर निगम के काम होंगे तेज : नगर निगम लुधियाना ने हाल ही में 50 साल ब्याज मुक्त कर्ज लेकर 150 करोड रुपए के विकास कार्य शहर के हलकों में करने है और प्रति हल्का विकास कार्य का टेंडर एक करोड रुपए से ज्यादा का है और ऐसे में इन प्रोजेक्ट को मंजूरी के लिए चंडीगढ़ चक्कर लगाने पड़ रहे हैं । इसी तहत सरकार ने यह फैसला लिया है कि ऐसे प्रोजेक्ट हर जिले में शुरू होने हैं । इसलिए लोकल स्तर पर चीफ इंजीनियर की बजाए 1 करोड़ से लेकर 2 करोड रुपए तक के प्रोजेक्ट के एस्टीमेट सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर ही मंजूर करेंगे। अब तक लुधियाना नगर निगम में सड़कों की मरम्मत, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, पार्कों के सौंदर्यीकरण और स्मार्ट सिटी से जुड़े कई काम चंडीगढ़ में तकनीकी स्वीकृति में देरी के कारण अटके रहते थे। लेकिन नई व्यवस्था के तहत 2 लाख तक के कार्यों को जूनियर इंजीनियर, 2 से 25 लाख रुपये तक के कामों को असिस्टेंट कॉरपोरेशन इंजीनियर, जबकि 25 से 50 लाख रुपये तक के विकास कार्यों को कॉरपोरेशन इंजीनियर तकनीकी मंजूरी दे सकेंगे। इसी तरह 50 लाख से 2 करोड़ रुपये तक के कामों को सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर और 2 से 10 करोड़ रुपये तक के बड़े प्रोजेक्ट्स को चीफ इंजीनियर स्वीकृति देंगे। 10 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं को चीफ इंजीनियर्स की कमेटी से हरी झंडी मिलेगी। सरकार ने हर स्तर पर फाइल निपटाने की समय सीमा भी तय कर दी है, जिससे काम अधिकतम 5 से 10 दिनों में आगे बढ़ सके।


