बुरहानपुर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप मोजेस के खिलाफ राज्य सरकार ने 15 दिसंबर को न्यायालय में अभियोजन चलाने की स्वीकृति दी थी, और अब इसी रिश्वतखोरी के मामले में लोकायुक्त कार्यालय ने मध्य प्रदेश सरकार से उन्हें निलंबित करने का अनुरोध किया है। मामला नर्मदापुरम में पूर्व पदस्थापन के दौरान रिश्वत लेने से जुड़ा है और फिलहाल निलंबन पर निर्णय लंबित है। मध्य प्रदेश सरकार ने डॉ. प्रदीप मोजेस के खिलाफ एक महीने पहले अभियोजन चलाने की स्वीकृति जारी की थी। यह आदेश बाद में सामने आया। डॉ. मोजेस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 12, 13-1 बी, 13-2 (संशोधन 2018) और धारा 120 बी भादंवि के तहत अभियोजन की अनुमति दी गई है। लोकायुक्त ने सरकार को लिखा पत्र 30 जनवरी को एसपी विशेष पुलिस स्थापना, लोकायुक्त कार्यालय भोपाल ने प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश सरकार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, मंत्रालय भोपाल को पत्र भेजा। इसमें डॉ. प्रदीप मोजेस और नर्मदापुरम की एक तत्कालीन महिला संविदा लेखापाल के निलंबन की अनुशंसा की गई है। यह पत्र अब सार्वजनिक हुआ है। नर्मदापुरम पदस्थापन के दौरान रिश्वत का मामला पूरा मामला रिश्वतखोरी से जुड़ा है। डॉ. प्रदीप मोजेस और एक महिला संविदा लेखा प्रबंधक ने सीएमएचओ कार्यालय नर्मदापुरम में पदस्थ रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया था। दोनों ने सहायक ग्रेड-3 मदनमोहन वर्मा से बिल भुगतान के बदले रिश्वत की मांग की थी। यह घटना 29 अप्रैल 2022 की है। लोकायुक्त ने रंगे हाथों पकड़ा 2 मई 2022 को डॉ. प्रदीप मोजेस ने 2 हजार रुपए और महिला लेखा प्रबंधक ने 3 हजार रुपए रिश्वत के रूप में लिए थे। इसी दौरान लोकायुक्त टीम ने दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया था। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं स्तर पर गठित राज्य स्तरीय समिति की 10 नवंबर 2025 को हुई बैठक में इस प्रकरण में अभियोजन स्वीकृति की अनुशंसा की गई थी। लोकायुक्त ने अपने पत्र में मध्य प्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम 1966 के नियम 9-1 बी का हवाला दिया है, जिसके अनुसार शासकीय सेवक के विरुद्ध अपराध में चालान प्रस्तुत होने पर संबंधित कर्मचारी को निलंबित किया जाना अनिवार्य है।


