लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन के 57 हजार 993 मामले का निष्पादन

भास्कर न्यूज | हजारीबाग हजारीबाग सिविल कोर्ट में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया । जिसका शुभारंभ पूरे राज्य में एक साथ ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने किया। इस मौके पर उनके साथ न्यायमूर्ति अनुभा रावत भी मौजूद थी। झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह के आधार पर प्री-लिटिगेशन के 57 हजार 993 मामले जबकि 7 हजार 111 लंबित राजस्व न्यायालय एवं दीवानी न्यायालय के मामलों का निष्पादन किया गया। इस नेशनल लोक अदालत में कुल 75 करोड़ 08 लाख 97 हजार 581 रुपए की राशि पर सहमति बनी। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के बैनर तले आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत की अगुवाई प्रधान जिला जज रणजीत कुमार ने किया। इस मौके पर उनके साथ मंच पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम संजीता श्रीवास्तव, जिला वन पदाधिकारी मौन प्रकाश, हजारीबाग बार संघ अध्यक्ष राजकुमार और बार संघ उपाध्यक्ष विजय कुमार सिंह मौजूद थे। इस कार्यक्रम में सभी न्यायिक पदाधिकारी, वकील, संबंधित विभाग के पदाधिकारी और पक्षकार भी शामिल हुए। इस मौके पर प्रधान जिला जज रणजीत कुमार ने कहा कि मामलों के निष्पादन में लोक अदालत एक ऐसा वैकल्पिक माध्यम है, जिससे त्वरित व सुलभ न्याय मिलता है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि पूरे देश में झारखंड लोक अदालत के मामले में सबसे आगे हैं। उन्होंने सभी से लोक अदालत को अपनाने की बात कही। बार संघ अध्यक्ष राजकुमार ने कहा कि हमेशा से ही बार संघ लोक अदालत में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है और हरसंभव मदद करने को लेकर तैयार है। उन्होंने पक्षकारों से इसे ज्यादा-से-ज्यादा अपनाने की बात कही। बार संघ उपाध्यक्ष विजय कुमार सिंह ने भी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वैसे मामले जिसमें पक्षकारों के बीच थोड़ी असमंजस की स्थिति हो, वहां न्यायिक पदाधिकारी हस्तक्षेप कर मामलों का निष्पादन करा सकते हैं। मंच का संचालन न्यायिक पदाधिकारी अनुष्का जैन ने किया। जबकि धन्यवाद ज्ञापन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने दिया। मामलों के निष्पादन के लिए 11 बेंच का गठन किया गया था। इन मामलों का निपटारा नेशनल लोक अदालत में बैंक रिकवरी के 604 मामले, सुलहनीय आपराधिक 226 मामले, बिजली के 290 मामले, भू-अर्जन के 1018 मामले, श्रम विवाद से संबंधित 1 मामले, मोटर वाहन दुर्घटना दावा से संबंधित 10 मामले, वैवाहिक विवाद से संबंधित 21 मामले, सिविल प्रकृति के 10 मामले, पानी बिल व अन्य टैक्स से संबंधित 169 मामले, चेक बाउंस के 85 मामले, वित से संबंधित 23598 मामले और अन्य 39 हजार 72 मामलों का निपटारा पक्षकारों की आपसी सहमति से किया गया। नेशनल लोक अदालत में कार्यपालक न्यायालय और सिविल कोर्ट दोनों के मामलों का निष्पादन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने यह जानकारी दी।

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