डिंडोरी में शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में नेशनल लोक अदालत आयोजित की गई। इस दौरान 327 लंबित प्रकरणों का निपटारा किया गया और 78 लाख 2 हजार 149 रुपए का अवॉर्ड पारित हुआ। लोक अदालत में 25 जोड़ों का पुनर्मिलन भी हुआ, जिन्होंने अपने विवाद सुलझाकर एक साथ रहने का फैसला किया। न्यायाधीश के सामने एक-दूसरे को जयमाला पहना घर के लिए रवाना हुए। कुटुंब न्यायालय में सुनवाई के लिए रखे गए 35 पारिवारिक विवाद के प्रकरणों में से 25 जोड़ों ने आपसी सहमति से राजीनामा कर लिया। न्यायाधीशों और सदस्यों के समक्ष इन जोड़ों ने एक-दूसरे को माला पहनाई और भविष्य में साथ न छोड़ने की कसमें खाईं। इस दौरान न्यायाधीश मुन्ना लाल राठौर, सदस्य हेमंत पद्माकर और जय सिंह ठाकुर मौजूद रहे। पुनर्मिलन करने वाले जोड़ों में माधोपुर निवासी नितेंद्र मरावी और अनूपपुर जिले के मझौली गांव की विद्या बाई भी शामिल थीं। नितेंद्र ने बताया कि 10 साल पहले उनका विवाह हुआ था और उनके दो बच्चे हैं, जो पांचवीं और पहली कक्षा में पढ़ते हैं। पांच महीने पहले हुए विवाद के बाद विद्या बच्चों के साथ मायके चली गई थीं और उन्होंने कुटुंब न्यायालय में केस दर्ज कराया था। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव आशीष केशरवानी ने बताया कि लोक अदालत में पारिवारिक विवाद, एक्सीडेंटल क्लेम, चेक बाउंस, राजीनामा योग्य आपराधिक प्रकरण, दीवानी वसूली, बैंकों के ऋण, बिजली बिल, फोन बिल और नगर पालिका के टैक्स से संबंधित मामले रखे गए थे। प्री-लिटिगेशन श्रेणी के 37 प्रकरणों में विभिन्न विभागों को 1 करोड़ 20 लाख 63 हजार 375 रुपये की राशि प्राप्त हुई। कई सुनवाई के बाद दोनों ने साथ रहने का फैसला किया। विद्या बाई ने कहा कि बच्चे छोटे हैं और पति-पत्नी के बीच कभी-कभार नोकझोंक होती रहती है। उन्होंने स्वीकार किया कि वह कुछ ज्यादा गंभीर हो गई थीं, लेकिन अब वे साथ रहेंगे और बच्चों का भविष्य संवारेंगे। उन्होंने यह संदेश भी दिया कि घर में कितने भी विवाद हों, साथ रहना ही चाहिए क्योंकि दूर रहने से और समस्याएँ बढ़ती हैं। नेशनल लोक अदालत में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शशिकांता वैश्य, कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया, एसपी वाहिनी सिंह, जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष यू.के. पटेरिया सहित अन्य न्यायाधीश, विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।


