राजधानी रांची स्थित लोक भवन उद्यान 8 फरवरी तक आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। सोमवार को पहले ही दिन उद्यान ने जबरदस्त आकर्षण बटोरा और कुल 2559 लोगों ने यहां भ्रमण कर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया। उद्यान भ्रमण का समय सुबह 10 बजे से शाम 3 बजे तक है, जबकि सुरक्षा जांच के बाद लोक भवन के गेट संख्या-2 से दोपहर 1 बजे तक प्रवेश दिया जा रहा है। उद्यान खुलते ही लोगों में इसे देखने का उत्साह साफ नजर आया। सुबह से ही प्रवेश द्वार पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। रंग-बिरंगे फूलों और फव्वारों ने मोहा मन लोक भवन उद्यान के खुलते ही यह शहरवासियों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गया। सैकड़ों की संख्या में लोग परिवार, दोस्तों और बच्चों के साथ यहां पहुंचे। सुसज्जित गार्डन, आकर्षक फव्वारे और हरियाली से घिरे रास्तों ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उद्यान में घूमने आए लोग इसकी सुंदरता की तारीफ करते नहीं थक रहे थे। युवा वर्ग और छात्र-छात्राएं फूलों की क्यारियों और खूबसूरत पृष्ठभूमि के बीच सेल्फी और तस्वीरें लेते नजर आए, वहीं बुजुर्गों ने शांत वातावरण में टहलते हुए प्रकृति के बीच सुकून के पल बिताए। 30 हजार गुलाबों की है बहार इस बार लोक भवन उद्यान में गुलाबों की खास बहार देखने को मिल रही है। यहां 30 हजार से अधिक गुलाब के पौधे लगाए गए हैं, जिनमें लाल, पीले और गुलाबी रंग के फूल पूरे परिसर को रंगीन बना रहे हैं। खास आकर्षण उन पौधों का है, जिनमें एक ही पेड़ पर अलग-अलग रंगों के गुलाब खिले हुए हैं। इसके अलावा सीजनल फूलों की सजी-धजी क्यारियां, पहली बार लगाए गए ट्यूलिप, कैना लिली, मरक्यूरिस और रेननकुलस जैसे दुर्लभ फूल भी दर्शकों को खूब लुभा रहे हैं। फूलों की खुशबू से पूरा परिसर महकता नजर आया। राज्यपाल ने किया उद्यान का निरीक्षण उद्यान में बनाए गए कृत्रिम पहाड़, झरने और फव्वारों से गिरता पानी लोगों को प्राकृतिक एहसास दे रहा है। झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती सोहराई पेंटिंग, महापुरुषों और शहीदों की प्रतिमाएं भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। पीला बांस, रुद्राक्ष, कल्पतरु, स्ट्रॉबेरी, इलायची और तेजपत्ता जैसे पौधों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। इस दौरान राज्यपाल महोदय ने स्वयं लोक भवन उद्यान का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और नागरिकों से सुझाव भी लिए। कुल मिलाकर लोक भवन उद्यान प्रकृति प्रेमियों, परिवारों और विद्यार्थियों के लिए सुकून और आनंद का नया ठिकाना बनकर उभरा है।


