हूल दिवस के मौके पर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानों को विभिन्न राजनीतिक दल एवं संगठनों ने याद किया। सोमवार को मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर सभी राजनीतिक दलों एवं संगठनों ने फूलमाला चढ़ाकर उन्हें याद किया। इस मौके पर झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि हूल दिवस को हम क्रांति दिवस के रूप मे भी मनाते हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी महापुरुषों के जो संघर्ष और कार्य रहे हैं, विशेषकर आदिवासी और स्थानीय समुदाय लोगों के लिए, वह अद्वितीय है। उनके किए गए कार्यों ने यहां के लोगों में ऊर्जा भरने का काम किया है, उसी ऊर्जा से हम ये प्रण लेकर यहां से जाते हैं कि चाहे हम सत्ता मे रहें या ना रहें, राज्य के लोगों के हक और अधिकार के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। इस मौके पर पवन जेडीया, अश्विनी शर्मा, हेमलाल मेहता, धर्मेंद्र सिंह, सोनू मुंडा सहित कई शामिल हुए। सभी ने सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानों को याद किया और उनके कार्यों से प्रेरणा और मार्गदर्शन लेने का प्रण लिया। युवा राष्ट्रीय जनता दल ने सिदो-कान्हू पार्क में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। इस अवसर पर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो जैसे महान आदिवासी योद्धाओं को माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। प्रदेश अध्यक्ष रंजन यादव ने कहा कि यह लड़ाई केवल अंग्रेजों की हुकूमत के खिलाफ नहीं थी, बल्कि यह जल, जंगल और जमीन को बचाने की सबसे बड़ी लड़ाई थी। सिदो-कान्हू और फूलो-झानो की यह क्रांति भारत की पहली जनक्रांति थी, जिसने शोषणकारी व्यवस्था को ललकारा। राजद ने संकल्प लिया कि इनके विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का काम करेंगे। इस मौके पर अनीता यादव, धर्मेंद्र सिंह, रवि जायसवाल, क्षितिज मिश्रा सहित कई शामिल थे। आदिवासी संगठनों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए हूल दिवस के मौके पर आदिवासी बचाओ मोर्चा ने भी िसदो-कान्हू को श्रद्धासुमन अर्पित किया। प्रेम शाही मुंडा, निरंजना हेरेंज, कुंदरसी मुंडा, अभय भूट कुंवर, अंजना हरीश टोप्पो, संगीता टोप्पो, पार्वती उरांव, उर्मिला भगत आदि शामिल हुए। केंद्रीय सरना संघर्ष समिति ने भी माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय सरना संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष शिवा कच्छप ने कहा कि अपने हक के लिए संघर्ष करना हर झारखंडी की पहचान है। इस मौके पर सती तिर्की, मनोज कुमार, नुरी तिर्की, महादेव टोप्पो, कुईली उरांव, भानु उरांव, अनिता उरांव, संगीता गाड़ी, बसंती कुजूर आद शामिल हुए। केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि आज हूल दिवस के पावन अवसर पर हेमंत सोरेन सरकार ने अपनी ओछी राजनीति का परिचय दिया है। मुंडा ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। संविधान की प्रस्तावना के पाठ से शुरू हुआ कार्यक्रम स्थानीय लोयोला ट्रेनिंग सेंटर में और वर्किंग पीपुल्स एलांयस सोशल अपोस्टोलेट रांची प्रोविंस, होफमैन ला एसोसियेट मनरेसा हाउस में सिदो-कान्हू,चांद-भैरव, फुलो-झानो के आंदोलन को याद करते हुए श्रद्धांजलि श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। इस मौके पर कहा कहा गया कि आदिवासी कभी पराजित नहीं हुआ, बल्कि हमेशा जीता है। वह इसलिए कि आदिवासी समाज समुदाय हमेशा से जल जंगल जमीन को बचाते आ रहा है। इस मौके पर लोयला ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक फादर मुकूल लकड़ा, प्रभाकर तिर्की, रतन तिर्की ने आदि ने अपने विचार रखे।


