नक्सलियों के खौफ के कारण 2005 के बाद अब पूवर्ती सहित इसके आसपास के गांव टेकलागुड़म, मिससीगुडम, सिलगेर, पूवर्ती जैसे गांवों की आधी आबादी तो गांव छोड़कर पड़ोसी राज्य तेलंगाना और आंध्रप्रदेश भाग गए थे, बचे हुए लोगों को शासन की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल रहा था। आधे से ज्यादा परिवारों के पास तो राशन कार्ड ही नही हैं। पूवर्ती गांव में 900 की आबादी है, यहां 160 परिवार 8 पारा में हैं। राशन के लिए ग्रामीणों को जंगल के रास्ते पैदल 25 किलोमीटर जगरगुंडा जाना पड़ता था, जगरगुंडा में आसपास के क्षेत्र की 10 दुकान शिफ्ट कर दी गई थी और यहां 6 महीने में 1 बार हजारों जवानों की सुरक्षा के बीच राशन पहुंचाया जाता था। अब पूवर्ती में ही पीडीएस दुकान अभी हाल ही में ही खोल दी गई है जिससे लोगों को अब मीलों पैदल नहीं चलना पड़ रहा है। जल्द ही शुरू होगा पूवर्ती का बंद साप्ताहिक बाजार
पूवर्ती गांव में लगने वाला बाजार भी जल्द शुरू करने की तैयारी है। यहां के ग्रामीणों ने बताया अभी सिलगेर और दूसरे साप्ताहिक बाजारों से सामान लाकर अपनी जरूरत पूरा करते हैं, चावल तो अब गांव में ही मिलने लगा है। जल्द ही गांव का बाजार भी शुरू करने की तैयारी है। यहां शनिवार या मंगलवार दो में से एक दिन बाजार लगाने की बात ग्रामीणों ने बताई। इस गांव में अब नए सिरे से सब कुछ शुरू किया जा रहा है, सभी ग्रामीणों को पीडीएस सिस्टम का लाभ मिले इसके लिए राशन कार्ड भी तैयार किए जाएंगे।


