लोपोके सीएचसी में मरीज की कथित आत्महत्या मामले में मेडिकल बोर्ड ने सिविल सर्जन को सौंपी रिपोर्ट

सीएचसी लोपोके में लोहड़ी के दिन 13 जनवरी को विनोद कुमार की कथित आत्महत्या मामले में गठित 5 सदस्यीय मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट विवादों में घिर गई है। शिकायतकर्ता ने रिपोर्ट में “गंभीर विरोधाभास, गायब दस्तावेज और अनदेखे सबूत’ होने का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र हाई पावर मेडिकल बोर्ड बनाने की मांग की है। बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट सिविल सर्जन अमृतसर डॉ. सतिंदरजीत सिंह बजाज को सौंपी है। मेडिकल बोर्ड में सिविल अस्पताल अमृतसर के एमएस सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. जोधवीर सिंह, एमडी एनेस्थीसिया डॉ. सामिया कोहली, एमडी मनोचिकित्सक डॉ. ईशा धवन, एमडी मेडिसिन डॉ. रजनीश कुमार और सहायक सिविल सर्जन डॉ. रजिंदर पाल कौर शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, मरीज को 11:35 बजे इमरजेंसी में लाया गया और 11:55 बजे गुरु नानक देव अस्पताल रेफर कर दिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि महज 20 मिनट में जांच, इंजेक्शन, सर्जन से परामर्श और रेफर करने की प्रक्रिया व्यावहारिक नहीं लगती। शिकायतकर्ता ने मौजूदा रिपोर्ट को रद्द कर वरिष्ठ विशेषज्ञों के साथ स्वतंत्र हाई पावर मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग की है। मजीठा रोड स्थित मून एवेन्यू निवासी परवीन कुमार ने आरोप लगाया कि मरीज और उसे अस्पताल लाने वाले व्यक्ति ने बार-बार सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की थी, जबकि पेट दर्द का जिक्र नहीं किया गया। इसके बावजूद डॉक्टरों और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में पेट दर्द को प्रमुख कारण बताया गया। शिकायत में यह भी कहा गया कि मेडिकल रिकॉर्ड में ऑक्सीजन देने, ईसीजी, नब्ज, ब्लड प्रेशर या ब्लड शुगर जैसी आपातकालीन जांचों का उल्लेख नहीं है। रिपोर्ट में अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे होने की बात कही गई है, लेकिन डीवीआर रिकॉर्डिंग डिवाइस उपलब्ध न होने का उल्लेख है। शिकायतकर्ता ने इसे संदिग्ध बताते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मामले में रिकॉर्डिंग का न होना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। सीएचसी लोपोके के ट्रीटिंग डॉक्टर डॉ. साहिल भारद्वाज और स्टाफ नर्स गगनप्रीत कौर, परमजीत कौर व नवनीत कौर को बयान के लिए तलब किया गया था। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि हाई पावर मेडिकल बोर्ड में सर्जन डॉ. जसकरण सिंह (जिन्हें मरीज की बिगड़ती हालत पर राय देने के लिए बुलाया गया था), वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी और सिविल सर्जन को भी शामिल किया जाए। परिजनों का आरोप है कि मौत से पहले मरीज ने फोन पर बताया था कि वह लगभग 2 घंटे से बिना उचित इलाज के था और उसे सांस लेने की समस्या थी। बाद में उसे अस्पताल परिसर में पानी की टंकी की ग्रिल से लटका हुआ पाया गया। परिवार का कहना है कि अस्पताल स्टाफ ने न तो उसे बाहर जाने से रोका और न ही समय पर सहायता दी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *