लोहरदगा : धूमधाम से हुई अमावस्या पूजा

लोहरदगा | जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2023 में लिखित एवं साक्षात्कार के बाद अंतिम रूप से चयनित होने वाले दो अभ्यर्थियों गौतम गौरव और कृष्णा कुमार शुक्ला को शुक्रवार को उपायुक्त डॉ ताराचंद ने सम्मानित किया। उपायुक्त ने दोनों को शॉल ओढ़ाकर व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। विदित हो कि गौतम गौरव को इस परीक्षा में चौथा रैंक हासिल हुआ है और वर्तमान में वे लोहरदगा जिला में मोटर वाहन निरीक्षक के पद पर सेवारत हैं। गौतम डाल्टेनगंज, पलामू के रहनेवाले हैं। वहीं कृष्ण कुमार शुक्ला को 96वां रैंक हासिल हुआ है और वे जिला के विज्ञान भवन स्थित जिला प्रशासन के पुस्तकालय में नियमित रूप से तैयारी कर रहे थे। यह उनका दूसरा प्रयास था। कृष्णा कुमार शुक्ला लोहरदगा जिला में महात्मा गांधी पथ, कृष्णापुरी के रहने वाले हैं। उपायुक्त ने दोनों के उज्ज्वल भविष्य और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। लोहरदगा | शहर के सुभाष चौक निकट स्थित श्रीश्री दुर्गा बाड़ी मंदिर में ही स्थित मां झारखंडेश्वरी काली मंदिर में गुरुवार की रात भव्य रूप से अमावस्या पूजा का आयोजन किया जाएगा। इसकी जानकारी देते हुए दुर्गाबाड़ी के सचिव तापस राय ने बताया कि हमेशा की तरह अमावस्या पूजन संध्या 7 बजे से हुई। पूजन समाप्ति के बाद रात्रि 9:30 बजे से भंडारा का भोग उपस्थित लोगों के बीच वितरित किया गया। उन्होंने बताया कि अमावस्या पर मां झारखंडेश्वरी काली की भव्य पूजा पुरोहित यादव राय की अगुवाई में की जाती रही है। उन्होंने मां काली के भक्तों से ससमय पूजन में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करने के पुण्य के भागी बताया। लोहरदगा | श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर, पुंदाग में 27 जुलाई से 31 जुलाई तक पांच दिवसीय संगीतमय श्रीकृष्ण बीतक कथा का आयोजन किया गया है। यह आयोजन परमहंस डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज के सानिध्य में होगा। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि कथा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कथा में वृंदावन से आ रहीं सुप्रसिद्ध कथावाचक साध्वी मीणा महाराज और साध्वी पूर्णा महाराज प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक श्रीकृष्ण लीला, रासोत्सव, भक्ति योग और जीवन दर्शन की व्याख्या करेंगी। दोनों साध्वी अपनी मधुर वाणी और आध्यात्मिक अनुभव से कथा को जीवंत करेंगी। श्रीकृष्ण बीतक कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, आत्मा की शुद्धि, मन की शांति और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला महायज्ञ है। कथा में श्रीकृष्ण के बाल्यकाल, युवावस्था, गीता ज्ञान, रासलीला और उनके अद्भुत चरित्र की झलक मिलेगी।

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