कोटा में बार एसोसिएशन ने राज्य सरकार पर नोटरी पब्लिक के अधिकार छीनने का आरोप लगाया है। एसोसिएशन ने नाराजगी जाहिर करते हुए जिला प्रशासन को केंद्र सरकार, कानून मंत्री व मुख्यमंत्री के नाम सोमवार को ज्ञापन दिया है। वकीलों ने नोटरियों को दिए गए अधिकार को वापस बहाल करने की मांग की। वकीलों ने कहा- राज्य सरकार के नए नियम से लोगों को आर्थिक नुकसान होगा, हम बेरोजगार हो जाएंगे। रजिस्टर कार्यालय में पंजीकृत करने पर ही मान्यता का नियम
बार एसोसिएशन कोटा के अध्यक्ष भारत सिंह अडसेला ने कहा- केंद्र सरकार की ओर से नोटरी अधिनियम के तहत नोटरी पब्लिक को लाइसेंस दिए गए हैं। लाइसेंस देते समय कोई बाध्यता नहीं थी। केंद्र सरकार द्वारा किरायानामा, लीज एग्रीमेंट, एग्रीमेंट टू सेल, संपत्ति संबंधी अनुबंध, घोषणा पत्र, शपथ पत्र, वसीयतनामा, मुख्तारनामा, हक त्याग और अन्य संबंधित दस्तावेज प्रमाणित करने का राइट दिया था। राज्य सरकार द्वारा अपनी मनमर्जी से विक्रय इकरार, लीज अनुबंध, किरायानामा और अन्य संबंधित दस्तावेज नोटरी तस्दीक को प्रतिबंधित करते हुए मात्र रजिस्टर कार्यालय में पंजीकृत करवाए जाने पर ही मान्यता का नियम बनाया है। जो केंद्रीय नोटरी अधिनियम में नोटरी अधिकारों के विपरीत है। वकील हित में नहीं है। हमने विधि मंत्री, केंद्र व राज्य सरकार के नाम ज्ञापन भेजा है। हमारी मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन करेंगे। प्रावधान से होगा आर्थिक नुकसान
महासचिव शंभू सोनी ने कहा- राजस्थान सरकार ने इकरारनामा, मुख्तारनामा, वसीयतनामा सहित अन्य दस्तावेज नोटरी से प्रमाणित करने का मना करते हुए रजिस्ट्रार के यहां से रजिस्टर्ड करने का प्रावधान रखा है। इससे हमारे नोटरी व्यवसाय पर असर पड़ रहा है। इस प्रावधान से नोटरी वकील व उनके सहायकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो रहा है। इस प्रावधान से लोगों को आर्थिक नुकसान होगा। साथ ही नोटरी वकील भी बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंंने कहा- हम लोगों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।


