रानीबड़ौद | क्षेत्र में खनन माफियाओं के हौंसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वह प्रशासन और कानून को खुली चुनौती देने लगे हैं। विभाग वन भूमि पर बनाए गए रास्तों को बंद करने के लिए खाइयां खोद रहा है और अवैध खननकर्ता दिनदहाड़े जेसीबी मशीनों से मिट्टी भरकर उन्हें बंद कर रहे हैं। उसी रास्ते से बेखौफ होकर भारी डंपरों, मशीनों का परिवहन शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों, वन प्रेमियों की शिकायत पर गत 19 जनवरी को वन विभाग की ओर से कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय एवं मिसाई रोड क्रेशर के पीछे वन भूमि में बने अवैध रास्ते बंद किए गए थे। जिसे दबंगों ने जबरन मिट्टी भरकर खाइयों को बंद कर रास्ते खोल लिए गए। अवैध खनन के माल का परिवहन करने के लिए जंगल और चरागाह भूमि से रास्ते बनाकर उपयोग किया जा रहा है। लीज की आड़ में अवैध खनन पर खनन विभाग की नजर नहीं है। लीजों के समीप ही वन भूमि पर क्लोजर बने हैं। जंगल और क्लोजरों में रहने वाले वन्य जीव ब्लास्टिंग के धमाकों से दहशत में रहते हैं। क्षेत्र के महरावता, रानीबड़ौद के ग्रामीणों का कहना है कि खनन और ब्लास्टिंग से न केवल जंगल और वन्यजीवों को नुकसान हो रहा है। कंपन से मकानों में दरारें आ रही हैं, खेतों की जमीन प्रभावित हो रही है, फिर भी प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा। कई बार ग्रामीणों ने एसपी को अवगत करवाया था, लेकिन प्रशासन भी ओवरलोड डंपरों के परिवहन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं करता। अवैध रास्ते को बंद कर सख्त निर्देश दिए हैं। उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई करेंगे। वन भूमि का भी सीमांकन करवाया जाएगा। -दीपक शर्मा, क्षेत्रीय वन अधिकारी


