राजधानी स्थित वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में तीन बाघों को नया सुरक्षित आश्रय मिला है। इनमें सतपुड़ा नेशनल पार्क से रेस्क्यू कर लाया गया एक वयस्क बाघ और पेंच टाइगर रिजर्व के दो शावक शामिल हैं। तीनों की परिस्थितियां ऐसी थीं कि जंगल में उनका स्वयं शिकार कर पाना और स्वतंत्र रूप से जीवन यापन संभव नहीं था। इस कारण वन विभाग ने इन्हें नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए वन विहार में स्थानांतरित किया है। इन तीनों के आने के बाद वन विहार में बाघों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। सतपुड़ा का टाइगर बार-बार मनुष्यों के पास जाने की आदत, इसलिए शिफ्ट किया: कई बार कोर एरिया में छोड़े जाने के बाद भी यह बाघ इंसानी बस्तियों के आसपास पहुंच जाता था। मॉनिटरिंग में पाया गया कि उसमें मनुष्यों के प्रति असामान्य सहजता विकसित हो चुकी है, जो जंगल में उसके लिए बड़ा जोखिम थी। पेंच का शावक रेक्टल प्रोलेप्स के बाद सफल सर्जरी, पर जंगल योग्य नहीं: पेंच के टूरिज्म जोन में यह शावक गंभीर मिला था। संभवतः किसी जानवर के हमले में उसका मलाशय बाहर आ गया था। विशेषज्ञ टीम ने ‘रेक्टल प्रोलेप्स’ की सर्जरी की। पर स्वास्थ्य लाभ के बाद भी वह जंगल में स्वयं शिकार करने में सक्षम नहीं रहा। टुरिया गांव में मिला शावक मां से बिछड़कर कमजोर हुआ, जंगल में जिंदा नहीं रह सकता था : पेंच बफर के टुरिया गांव में मिला शावक मां से बिछड़ने और किसी हमले के बाद कमजोर हालत में बस्ती तक पहुंच गया था। इलाज के बाद भी उसमें जंगल में जीवित रहने की क्षमता नहीं पाई गई। इसलिए उसे वन विहार लाया गया। जंगल लौट न सकें तो वन विहार सुरक्षित घर… बाघ जैसे प्राणियों की इंसानों के साथ सहजता उनके लिए खतरनाक होती है। शिकार बन सकते हैं। इसके अलावा मां से बिछड़े या हमले में घायल बाघों के लिए वन विहार दूसरा रघर होता है। यहां उन बाघों को इलाज, भोजन और लगातार देखभाल मिलती है, जो जंगल दोबारा लौट नहीं सकते, लेकिन जीना चाहते हैं।


