मंडला में पटवारियों ने मंगलवार को रैली निकालकर मुख्यमंत्री और राजस्व सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों और एक व्यवसायी पर पटवारी संदीप कुशवाहा को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है, जिससे उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। यह ज्ञापन एडिशनल एसपी और डिप्टी कलेक्टर को सौंपा गया। शासकीय कारणों का हवाला देकर पटवारी को किया निलंबित पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष गीतू बैरागी ने बताया कि पटवारी संदीप कुशवाहा के मामा-मामी की जमीन एक व्यवसायी को बेचने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से उन पर दबाव बनाया गया था। बाद में, शासकीय कारणों का हवाला देते हुए 2 सितंबर को उन्हें निलंबित कर दिया गया। बैरागी ने आरोप लगाया कि बिना मोबाइल नंबर और पते वाली एक अज्ञात शिकायत के आधार पर पटवारी की आय से अधिक संपत्ति सहित विभिन्न जांचें शुरू कर दी गईं। तीन महीने तक अधिकारियों से मुलाकात और आवेदन देने के बावजूद उन्हें बहाल नहीं किया गया। इस दौरान उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। मामले की उच्च स्तरीय जांच, अधिकारियों के तबादले की मांग 18 दिसंबर को संदीप कुशवाहा की ओर से सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के बाद मामला गरमा गया। इसके बाद उन्हें पिछली तारीख से बहाली के आदेश जारी कर दिए गए। गीतू बैरागी ने ज्ञापन के माध्यम से मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की कि जांच के दौरान मामले से जुड़े अधिकारियों को जिले से बाहर स्थानांतरित किया जाए और पटवारी के इलाज का खर्च प्रशासन वहन करे। मांगें पूरी न होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी गई है। एएसपी बोले- मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी एडिशनल एसपी शिवकुमार वर्मा ने बताया कि पटवारी संघ ने ज्ञापन सौंपा है और मामले की जांच करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई आपराधिक प्रकरण सामने आता है, तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। डिप्टी कलेक्टर क्षमा सराफ ने पुष्टि की कि पटवारी संघ ने मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव को संबोधित ज्ञापन सौंपा है। इसमें कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार के खिलाफ कुछ मांगें रखी गई हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की बात कही और आश्वासन दिया कि ज्ञापन संबंधित अधिकारियों को भेज दिया जाएगा।


