जबलपुर में चौथी वर्ल्ड रामायण डे कॉन्फ्रेंस चल रही है। 2 जनवरी को इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। रामायण कॉन्फ्रेंस का हिस्सा बनने के लिए दुनिया के कोने-कोने से राम भक्त पहुंचे हैं। अलग-अलग कलाकारों की प्रस्तुतियां हुईं हैं। इसी तरह का कार्यक्रम दूसरे दिन यानी 3 जनवरी को भी चला। वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में यूएसए, इंडोनेशिया, थाईलैंड, चीन, वियतनाम, नेपाल, श्रीलंका यहां तक कि बांग्लादेश से भी रामभक्त और रामायण प्रेमी पहुंचे। इन्हीं में से दैनिक भास्कर ने 5 देशों के रामभक्तों से बात की। रामायण पर रिसर्च के साथ पढ़ाते हैं प्रोफेसर डॉ. फान
प्रोफेसर फान रामायण कॉन्फ्रेंस का हिस्सा बने। उन्होंने बताया कि वो वियतनाम की यूनिवर्सिटी ऑफ सोशल साइंस एंड ह्यूमैनिटी के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। फान ने कहा कि मैं अपनी यूनिवर्सिटी और अपने देश में एनसिएंट कल्चर जैसे जांबाह और ओनाम पर रिसर्च कर रहा हूं। ये दोनों किंगडम भारतीय संस्कृति से प्रेरित हैं। हमारी रिसर्च के सामने आया कि रामायण हमारे देश में 7वीं शताब्दी में आ गई थी। वियतनाम के कई समुदाय इंडियन कल्चर से प्रभावित हैं। ये राम और सीता की वेडिंग एनिवर्सरी को सेलिब्रेट करते हैं। इनके डांस सेलिब्रेशन में भी रामायण के कैरेक्टर होते हैं जैसे हनुमान और रावण। कामिर कम्युनिटी हर हफ्ते इस डांस को परफॉर्म करती है। प्रोफेसर फान ने बताया कि ये इवेंट इंडिया के साथ साउथ एशियन देशों के लिए स्पेशल इवेंट है। क्योंकि मैं मानता हूं कि इंडिया के अलावा वहां भी रामायण बहुत फेमस है। इस कॉन्फ्रेंस में आए इंडियन स्कॉलर्स और दुनियाभर के आए स्कॉलर्स से रामायण के बारे में बहुत कुछ जाना है। ये मेरी रिसर्च के काम आएगा। हम वियतनाम में यूनिवर्सिटी के रामायण को पढ़ाते हैं। वियतनाम में एक थिएटर ग्रुप रामायण को परफॉर्म भी करता है। ये वियतनाम का फेमस थिएटर वर्क मन जाता है। यहां रामायण में सीता कहा जाता है हमारे वियतनाम में सेडा कहते हैं। मैने पर्सनली रामायण से प्रेम सीखा है। रामायण और सीता के बीच का प्रेम बेहद प्रेरणादायक है। चीन की जोया ने चीनी भाषा में ट्रांसलेट की श्रीमद्भागवत गीता जोया ने बताया कि वो चीन से हैं, लेकिन पिछले 25 सालों से आयरलैंड और माल्टा में रह रही हैं। उन्होंने कहा कि मैं यहां रामायण कॉन्फ्रेंस अटैंड करने आई हूं। इसके पीछे का कारण ये है कि भगवान राम और रामायण के प्रति मेरे दिल में प्रेम और पैशन है। उनकी कृपा से ही मैं यहां पहुंची हूं। अपने स्प्रिचुअल गुरु के जरिए मुझे यहां के कॉन्फ्रेंस की जानकारी लगी और मैं यहां पहुंची।
मैंने 2 साल की मेहनत से श्रीमद्भागवत को चीन की भाषा में ट्रांसलेट किया है। ट्रांसलेशन सामान्य नहीं था। हिंदी से चीनी भाषा का सामान्य ट्रांसलेशन करना बहुत आसान है, लेकिन मैने उसकी मीनिंग समझते हुए उसे चीनी भाषा में ट्रांसलेट लियाम इसके लिए मैं पूरी तरह स्प्रिचुअल बनी भागवत गीता की मीनिंग को समझा। इसकी चीन में काफी चर्चा है। अब मेरा भविष्य का प्लान है कि अन्य वैदिक ग्रंथों का चीनी भाषा में ट्रांसलेट करूं। बांग्लादेश की शरीन ने कहा – रामायण से फेमिनिज्म स्ट्रांग हुआ जहां एक तरफ बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हो रहे अत्याचार और उनकी हत्याओं के विरोध में प्रदर्शन चल रहे हैं। आईपीएल टीम में बांग्लादेशी खिलाड़ी को खरीदने पर एक्टर शाहरुख खान के खिलाफ बयानबाजी चल रही है। इसी बीच जबलपुर में चल रहे वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में डॉ. शरीन शाहजहां नाओमी पहुंची। उन्होंने बताया कि वो एक एकेडमिक हैं और इको फेमिनिज्म पढ़ाती हैं। उन्होंने कहा, इको फेमिनिज्म पढ़ाने के दौरान मैने इंडियन इको फेमिनिस्ट वंदना शिवा को जाना। इको फेमिनिज्म के मुझे ये समझ आया कि नारी और प्रकृति शक्ति का स्वरूप है। हमें दोनों की रिस्पेक्ट करनी चाहिए। जब मुझे रामायण के बारे पता चला। मैने उसे पढ़ा तो यही रिस्पेक्ट वाली बात मुझे उसमें भी मिली। रामायण में भगवान राम की जो यात्रा है वो शक्ति के सम्मान के लिए समर्पित है। उनकी पूरी यात्रा सीता माता के लिए ही है। यही इको फेमिनिज्म है। मैं यही कहना चाहूंगी कि हिंदुस्तान में जो पश्चिमी पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है। उसके साथ रामायण भी पढ़ाई जानी चाहिए। मैं हर दिन 80 मिनट मेडिटेशन योग करती हूं। खास तौर पर सुदर्शन क्रिया करती हूं ये मुझमें रामायण की समझ बढ़ाती है। रामायण की महानता शब्दों से परे है। इसके बहुत से बेहतरीन मायने हैं। मैने ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की है। रामायण से जुड़ाव के पीछे शाहरुख खान की स्वदेश मूवी वजह है। मैं स्वदेश मूवी देख रही थी उसमें एक एक्ट्रेस रामायण से जुड़ा गाना गा रही थी, शाहरुख खान को इस बारे में बता रही थीं। उससे मैं प्रभावित हुई और गहराई से रामायण को जाना। आज की बहुत सी यांग महिलाओं को उनके पति के साथ रहने में टॉक्सिक्सिटी जैसी फिलिंग आ रही है। उनका फेमिनिज्म उन पर भरी पद रहा है। उनकी जिंदगी पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। वो रामायण पढ़ेंगी, समझेंगी तो उनको काफी मदद मिलेगी। उन्हें सीता के समर्पण से काफी कुछ सीखने को मिलेगा। इंडिया बांग्लादेश के रिश्तों वाले सवाल पर शरीन ने कहा, मुझे लगता है कि इंडिया बांग्लादेश के रिश्ते कुछ दिनों में ठीक हो जाएंगे। हिंदुओं की हत्याओं की जो बातें सामने आ रही हैं इसको लेकर इंडियन गवर्नमेंट चिंतित है। सिचुएशन को ऑब्जर्व कर रही है। बांग्लादेश सरकार भी ये नहीं चाहती। श्रीलंकाई वायलिनिस्ट डॉन दिनेश ने ॐ जय जगदीश हरे सुनाया कॉन्फ्रेंस में श्रीलंका के पॉपुलर वायलिनिस्ट डॉन दिनेश भी कॉन्फ्रेंस के शामिल होने आए हैं। दिनेश ने कहा कि मैं यहां इसलिए हूं, क्योंकि साल 2007 में मुझे रावण की लेगसी के वाद्य यंत्र मिले। किंगरी, कोटनकाछी, रावण हस्र, 16वीं 17वीं शताब्दी के हिस्टोरियन इसे रावण हाथ बोलते हैं। मैंने ब्रिटिश म्यूजियम में यूरोपियन पेंटर की बनाई एक पेंटिंग देखी थी जिसमें रावण हाथ मौजूद था। ये 12वीं 13वीं शताब्दी में बनाई गई थी।
ये वही यंत्र था जिसके वर्जन के तौर पर हम यहां पायोनियर वायलिन कहकर यूज करते हैं। वेद और रामायण के मुताबिक तार के द्वारा बजने वाले दो तरह के यंत्र थे। रुद्र वीणा जिसे हाथ के बजाया जाता था और दूसरा रावण वीणा जिसे धनुष से बजाया जाता है। मैने इसके बारे में काफी रिसर्च की। फिर मैं पश्चिमी देशों के गया मैने वहां इन यंत्रों को रेट्रोड्यूस किया। इसके बाद मैं खुद से ही सेम रावण हाथ को श्रीलंका में रीइन्वेंट किया। श्रीलंका के बहुत से लोग हैं जो रावण को फॉलो करते हैं उनकी पूजा करते हैं। डॉन दिनेश ने मजाकिया लहजे में कहा कि सच कहूं तो यहां विलेन साइड को रिप्रेजेंट कर रहा हूं। भारत में जो ये कॉन्फ्रेंस हो रही है, बेहद प्यारा आयोजन है। मैं यहां बालासुब्रमण्यम से संपर्क के बाद पहुंचा हूं। बाला जी कोशिश कर रहे हैं कि श्रीलंका का जो रामायण का वर्जन है उसे इंडिया के वर्जन के साथ लाएं। साथ ही वो दुनिया में जहां जहां भी रामायण लिखी गई है उन्हें साथ लाकर दुनिया के सामने रखना चाहते हैं। सबके अलग-अलग मायने निकलेंगे उन्हें समझा जाएगा। मैं पश्चिमी देशों के जाकर उनके पायोनियर वायलिन के आधार को दिखाना चाहता हूं जो रावण की देन है। वेद की देन है। उन्होंने हमें रावण हाथ नाम के वाद्य यंत्र के जरिए ॐ जय जगदीश हरे बजा कर सुनाया। थाईलैंड के कित्ती फोन्ग ने हिंदी में बात की
कित्ती फोन्ग ने बात करते हुए कहा कि थाईलैंड से हम 7 लोगों की टीम यहां आई है। मैं थाईलैंड में हिंदी पढ़ाता हूं। मैं स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र में पढ़ाता हूं। ये इंडियन एंबेसी में है, भारत सरकार के अंतर्गत आता है। मेरी दोस्त इकराची कत्थक सिखाती है। थाईलैंड की अपनी रामायण है। उसे रामकियन कहा जाता है यानी राम की रति। थाईलैंड में आयेंगे तो देखेंगे कि वहां की संस्कृति में भारतीयता का प्रभाव मिलता है। थाई भाषा में भी कई संस्कृत शब्द यूज किए जाते हैं। हमारे साथ कई विद्वान आए हैं जो थाई हैं। उन्हें भारत सरकार से पद्मश्री जैसे सम्मान मिले हैं। उन्होंने भारतीय ग्रंथों का थाई भाषा में अनुवाद किया है। ये खबर भी पढ़ें… वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में देखें सैंड आर्ट मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। 2, 3 एवं 4 जनवरी को शहर के मानस भवन में होने वाले इस आयोजन में शामिल होने के लिए ना सिर्फ भारत बल्कि कई देशों से रामायण को जानने और सुनने वाले पहुंचे हैं। कार्यक्रम में भाग लेने बौद्ध भिक्षु श्रीलंका के उडुगामा सारनाथिसा और लाओस के आचरन सिफान डान भी पहुंच रहे हैं। इसके अलावा, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया के भी कलाकार एवं साहित्यकार जबलपुर पहुंचे हैं।पूरी खबर पढ़ें स्वामी रामभद्राचार्य बोले- राष्ट्रग्रंथ घोषित हो रामचरित मानस जबलपुर में शुक्रवार से 3 दिवसीय वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का आयोजन हो रहा है। कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए जगत गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि आज देश में शांति-शांति नहीं, बल्कि क्रांति-क्रांति हो रही है। रामचरित मानस को राष्ट्र ग्रंथ घोषित करना चाहिए। पीएम मोदी गांधी जी के भक्त हैं, विपक्ष के लोग भी भक्त हैं। मनरेगा का नाम बदलने को लेकर भी बहुत जगह विवाद चल रहा है। गांधी जी ने कीर्तन प्रारंभ किया था कि रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम।पूरी खबर पढ़ें


