वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर इकबाल सक्का की शिल्पकारी:36 घंटे की मेहनत से क्रिसमस डे के लिए 9 अनोखी कलाकृतियां बनाई, इन्हें आंखों से देखना नामुमकिन

उदयपुर के वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर और स्वर्ण शिल्पी इकबाल सक्का ने एक बार फिर सूक्ष्म कला के जरिए अपनी अलग पहचान दर्ज कराई है। क्रिसमस डे के अवसर पर उन्होंने ऐसी 9 अनोखी कलाकृतियां तैयार की हैं, जिन्हें नंगी आंखों से देख पाना लगभग नामुमकिन है। इन्हें देखने के लिए लेंस की जरूरत पड़ती है। डॉ. सक्का ने क्रिसमस थीम पर घास की झोपड़ी तैयार की और उसके भीतर चांदी से बनी विश्व की सबसे छोटी नौ कलाकृतियां स्थापित कीं। इनमें घास की छोटी टोकरी में मात्र 3 मिलीमीटर आकार में हजरत ईसा अलैहिस्सलाम (ईसा मसीह) के जन्म का प्रतीक स्वरूप रखा गया है। इसके साथ एक सेंटीमीटर आकार का चांदी का चर्च और 3 मिलीमीटर साइज के क्रॉस, मछली, बेल, कांटों का ताज, मोमबत्ती और स्टार भी बनाए गए हैं। इन सभी प्रतीकों के जरिए उन्होंने क्रिसमस के धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व को सूक्ष्म कला के माध्यम से दर्शाने की कोशिश की है। सक्का के नाम 121 वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हैं। डॉ. सक्का ने बताया कि इन कलाकृतियों को तैयार करने में 36 घंटे से अधिक का समय लगा। बेहद बारीक काम होने के कारण लगातार ध्यान और स्थिरता के साथ काम करना पड़ा। उन्होंने बताया कि इन सूक्ष्म कलाकृतियों को हिंदुस्तान बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए आवेदन किया गया था। जांच प्रक्रिया के बाद रिकॉर्ड को स्वीकार किया गया और 11 दिसंबर को आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि देश-विदेश में उदयपुर और राजस्थान की कला-परंपरा का नाम रोशन करना भी है। इसी सोच के साथ वे इन कलाकृतियों को जनता के बीच प्रदर्शित करना चाहते हैं। डॉ. सक्का ने बताया कि उन्होंने इन कलाकृतियों को उदयपुर के चेतक सर्कल स्थित 134 वर्ष पुराने शेफर्ड मेमोरियल चर्च में क्रिसमस डे पर रखने की इच्छा जताई है और इसके लिए चर्च प्रशासन से संपर्क किया है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द अनुमति मिल जाएगी, ताकि लोग नजदीक से इस अनोखी कला को देख सकें और समझ सकें कि सूक्ष्म कला किस हद तक संभव है।

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