वर्षा जल संरक्षण से बचा रहे 10 लाख लीटर पानी:कोडरमा में गिरते भू-जल स्तर के बीच प्रशासन ने भी सराहा

कोडरमा जिले के झुमरीतिलैया में महाराणा प्रताप चौक स्थित क्लोरोफिल स्कूल के निदेशक अजय अग्रवाल ने जल संरक्षण का एक अनूठा मॉडल विकसित किया है। यह मॉडल सालाना 10 लाख लीटर वर्षा जल का संरक्षण कर भू-जल स्तर को रिचार्ज कर रहा है। उनके इस प्रयास को जिला प्रशासन ने भी सराहा है। दरअसल, बीते कुछ वर्षों से कोडरमा जिले में भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है, जिससे झुमरीतिलैया नगर परिषद क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ गई है। जिला प्रशासन और नगर परिषद जल संरक्षण के लिए विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम चला रहे हैं। पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है
सिटी मैनेजर लेमांशु कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि वर्षा जल का संरक्षण नहीं किया गया और भूजल का अत्यधिक दोहन जारी रहा, तो अगले पांच वर्षों में शहर भूजल स्तर के मामले में ‘रेड जोन’ में पहुंच सकता है। इससे पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। अजय अग्रवाल ने बताया कि कोरोना काल (2020) में उनके विद्यालय का वर्षों पुराना कुआं सूख गया था, जिसमें केवल 6-7 इंच पानी बचा था। इस स्थिति ने उन्हें जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया। वर्षा जल संचयन के प्रति लोगों को जागरूक किया
उन्हें 15-16 साल पहले रोटरी क्लब के एक कार्यक्रम की याद आई, जहां उत्तर प्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और जल संरक्षण विशेषज्ञ महेंद्र मोदी, जिन्हें ‘जल गुरु’ के नाम से जाना जाता है, ने वर्षा जल संचयन के प्रति लोगों को जागरूक किया था। इसी प्रेरणा से उन्होंने यह मॉडल विकसित किया। उस समय लोगों ने इस दिशा में गंभीर पहल नहीं की। लेकिन उनकी बातें अजय अग्रवाल के मन में हमेशा बनी रहीं। यही वह समय था जब उन्होंने वर्षा जल संचयन की दिशा में ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया। उन्होंने बरसात के मौसम में छतों पर जमने और खेतों में गिरने वाले पानी को पाइप के माध्यम से सोखता में संचयन करना शुरु कर दिया। जल संरक्षण के साथ-साथ, फिल्टर से बारिश का पानी भी होता है साफ
उन्होंने बताया कि स्कूल की छतों से गिरने वाले बारिश के पानी को पाइप के माध्यम से एक विशेष तीन स्तरीय फिल्टर सिस्टम से जोड़ दिया है। जिससे सबसे पहले पानी गिट्टी, ईंट के टुकड़े और बालू से भरे चबूतरे से होकर गुजरता है, जहां पहली बार फिल्टर होता है। इसके बाद दूसरा फिल्टर गिट्टी से भरे दूसरे चैंबर में होता है और अंत में कुएं के बाहर लगे जाल से तीसरी बार फिल्टर होकर पानी सीधे कुएं में पहुंचता है।

गजब का आया बदलाव, अब नहीं होती पानी की किल्लत
अजय अग्रवाल ने बताया कि इस तकनीक का परिणाम बेहद सकारात्मक रहा। पहले जहां गर्मियों में कुआं लगभग सूख जाता था। वहीं, अब भीषण गर्मी के दिनों में भी उनके कुएं में 12 से 15 फीट तक पानी उपलब्ध रहता है। इसी पानी से पूरे स्कूल परिसर के बगीचे की सिंचाई की जाती है। जिससे विद्यालय परिसर में सालभर हरियाली बनी रहती है। उन्होंने कहा कि यहां आने वाले लोग गर्मी के मौसम में भी हरे भरे गार्डन को देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि कुएं में चार मांगुर मछलियां छोड़ी गई हैं। जो पानी को प्राकृतिक रूप से साफ रखने में मदद करती हैं। प्रत्येक वर्ष 10 लाख लीटर पानी की बचत
अजय अग्रवाल ने बताया कि बरसात के पानी का संरक्षण करने के साथ-साथ उनके द्वारा स्कूल के हैंड बेसिन और बाथरूम से निकलने वाले पानी को अलग-अलग फिल्टर यूनिट के माध्यम से साफ कर जमीन के भीतर रिचार्ज किया जाता है। इससे एक बूंद पानी भी नाली में नहीं बहता और भूजल स्तर लगातार मजबूत होता है. अजय अग्रवाल के अनुसार इस संपूर्ण जल संचयन प्रणाली को तैयार करने में लगभग एक लाख रुपये की लागत आई, इसलिए वह इसे लखटकिया प्रोजेक्ट मॉडल कहते हैं। उनका दावा है कि इस मॉडल के माध्यम से वे हर वर्ष करीब 10 लाख लीटर बारिश और उपयोग किए गए पानी को दोबारा संरक्षित कर भूजल रिचार्ज में इस्तेमाल करते हैं। नगर परिषद ने अजय के जज्बे को सराहा, लोगों से अजय से सीखने की अपील की
बताते चलें कि झुमरीतिलैया नगर परिषद भी इन दिनों जल संरक्षण को लेकर “कैच द रेन” (catch the rain) नामक एक कार्यक्रम चला रहा है। जिसके माध्यम से लोगों से वर्षा के जल संरक्षण की अपील की जा रही है। इन सब के बीच जब नगर परिषद को इसकी सूचना मिली तो न केवल उनके द्वारा अजय के कार्यों को सराहा गया, बल्कि लोगों को उनसे प्रेरणा लेने की अपील भी की गई। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अंकित गुप्ता ने बताया कि आज के समय में गिरता भूजल स्तर सबसे बड़ी समस्या हो गई है। ऐसे में लोगों को वर्षा के जल का संरक्षण करने के साथ-साथ पानी का अन्य तरीके से भी बचाव करना चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्षा के पानी को कैसे संरक्षित किया जाय, इसके लिए नगर प्रबंधक रणधीर वर्मा के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधि को अपनाने वाले लोगों को अगर कोई जानकारी चाहिए तो वे इस टीम से संपर्क कर सकते हैं।

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