झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की अदालत ने संपत्ति से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए प्रोबेट याचिका को खारिज करने के निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को प्रोबेट प्रदान करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि केवल संपत्ति का स्पष्ट विवरण न होना या वसीयत करने वाले की मृत्यु वसीयत के तुरंत बाद होना वसीयत को अमान्य नहीं कर सकता। अदालत ने कहा है कि किसी व्यक्ति की वसीयत को इस आधार पर अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि वसीयतकर्ता की मृत्यु वसीयत के तुरंत बाद हो गई या वसीयत में संपत्ति का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया। मालूम हो कि सीताराम गोस्वामी ने निचली अदालत द्वारात प्रोबेट याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ अपील दाखिल की है।


