वसीयत मामले में पुलिस जांच को अदालत ने खारिज किया:हस्ताक्षर पर संदेह उठाते हुए आरोपी को अदालत में पेश करने के आदेश

बीकानेर में फर्जी वसीयत की शिकायत पर पुलिस जांच में मामले को झूठा बताए जाने के बावजूद न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पुलिस की जांच रिपोर्ट को खारिज करते हुए आरोपी को न्यायालय में तलब करने के आदेश दिए हैं। मामला शहर के शेर बानों निवासी, सैयदया चौक, मदिना मस्जिद क्षेत्र का है। परिवादिया शेर बानों ने पुलिस थाना कोतवाली में एफआईआर दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया गया कि उसके देवर यासीन ने मकान हड़पने की नीयत से उसकी सास जनत की फर्जी हस्ताक्षर कर वसीयत अपने पक्ष में तैयार कर ली। इस एफआईआर पर पुलिस थाना कोतवाली में जांच की गई और मामले को झूठा मानते हुए न्यायालय में रिपोर्ट पेश कर दी गई। हालांकि परिवादिया शेर बानों ने अपने अधिवक्ता वसीम मकसूद के माध्यम से अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश संख्या एक की अदालत में गवाह अब्दुल गफ्फार के बयान दर्ज करवाए, साथ ही स्वयं के बयान भी न्यायालय में प्रस्तुत किए। एडवोकेट वसीम मकसूद ने बताया कि न्यायालय ने समस्त तथ्यों की जांच के बाद पाया कि वसीयत पर अंकित हस्ताक्षर प्रथम दृष्टया भिन्न प्रतीत होते हैं। वसीयत का का लाभ लेने वाला यासीन है, जिससे संपत्ति हड़पने की मंशा स्पष्ट होती है। न्यायालय ने माना कि वसीयत छलपूर्वक तैयार की गई और यह एक मूल्यवान प्रतिभूति है। इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी यासीन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 467 और 468 में संज्ञान लेते हुए उसे तलब करने के आदेश दिए। परिवादिया की ओर से पैरवी एडवोकेट वसीम मकसूद ने की।

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