सरकारी योजनाओं के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ाने के लिए पहली बार अनूठे तरीक से अभियान चलाया जाएगा। दरअसल, गांव–कस्बों में लाखों–करोड़ों रुपए के विकास कार्याें के निर्माण के दौरान अक्सर स्थानीय लोग सरकारी प्रोजेक्ट बताकर उस पर ध्यान नहीं देते। ऐसे में संबंधित निर्माण एजेंसी और ठेकेदार घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर लेते हैं। परिणामस्वरूप कम समय में ही निर्माण कार्याें की पोल खुल जाती है। मगर लाखों–करोड़ों रुपए बर्बाद हो जाते हैं। अब भू–संसाधन विभाग जलग्रहण विकास कार्याें में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने, पानी बचाने व जन भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रदेश के 27 जिलों में दो महीने तक वाटरशेड यात्रा के रूप में अभियान चलाएगा। इसके तहत केंद्र सरकार की ओर से एक रथ भेजा जा रहा है। जो संचालित हो रही 107 परियोजनाओं को कवर करेगी। राजस्थान की स्थितियों को देखते हुए जल संरक्षण को लेकर जागरूक किया जाएगा। गांव–गांव लोगों को पानी बचाने के लिए शपथ दिलाई जाएगी। इस दौरान गांव में सरकारी बजट से वाटरशेड के हो रहे कार्य जैसे टैंक, चेकडेम, एनीकट, खेत–तलाई आदि को दिखाया जाएगा। अगर कोई कार्य शुरू होना है तो उसका शिलान्यास और पूर्ण हुए कार्याें का लोकार्पण किया जाएगा। इस अभियान के तहत गांवों में होने वाले प्रत्येक कार्यक्रम में कम से कम 500 लोग होने जरूरी है। इसमें भी 80 प्रतिशत वे लोग होंगे जो जलग्रहण विकास योजनाओं से जुड़े और लाभार्थी होंगे। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीणों को पता होना चाहिए कि अपने क्षेत्र में जलग्रहण के कौनसे काम हो रहे हैं और वे गुणवत्तापूर्वक बन रहे हैं या नहीं। महिलाएं कलश यात्रा निकालेंगी, श्रमदान–पौधरोपण किया जाएगा धन-धान्य थीम पर आधारित वाटरशेड यात्रा की सफलता व अधिकाधिक लोगों को जोड़ने के लिए महिलाएं कलश यात्रा निकालेंगी। साथ ही साइकिल रैली व दौड़ जैसे आयोजन भी किए जाएंगे। विभिन्न सरकारी विभागों की योजनाओं से भी लोगों को जोड़ा जाएगा। स्वयं सहायता समूह, निजी कंपनियों, बैंक के स्टॉल भी लगेंगे। सेल्फी पांइट, आसपास के विकास कार्यों का बैनर भी लगाया जाएगा ताकि ग्रामीणों को पता चले।


