वाटरहीटर ट्रीटमेंट प्लांट:आईआईटीयन ने 15 लाख की नौकरी छोड़ी, सात साल में 400 करोड़ की इंडस्ट्री खड़ी की

किशनगढ़ के रहने वाले आईआईटीयन अंकित गर्ग नौकरीपेशा और युवा एंटरप्रन्योर्स के लिए मिसाल बनकर उभरे हैं। एक बड़ी कंपनी में 15 लाख रुपए सालाना के पैकेज पर काम करने वाले अंकित ने कैसे 7 सालाें में 400 कराेड़ की नेटवर्थ वाली इंडस्ट्री खड़ी कर दी, यह जानकर खासतौर से ऐसे युवा प्रेरणा ले सकते हैं जिनके पास हुनर हाेने के बावजूद वे नौकरीपेशा हैं। किशनगढ़ के आरके पाटनी कॉलेज में फिजिक्स के प्राे. रहे दिवंगत अश्विनी पाटनी के पुत्र अंकित अपने पार्टनर पंकज गाेटी के साथ मिलकर ग्रीन एनर्जी से जुड़ी कंपनी संचालित कर रहे हैं। अंकित का नाता मध्यमवर्गीय परिवार से है। माइनिंग मशीनरी में 2011 में आईआईटी धनबाद से डिग्री लेने के बाद अंकित ने 2015 तक 15 लाख के पैकेज पर एक बड़ी कंपनी के माइनिंग डिवीजन में बताैर इंजीनियर सेवाएं दीं। अंकित गुजरात का कार्य देखते थे, जिस कंपनी में वे काम कर रहे थे उसी कंपनी की डीलरशिप पंकज के पास थी। दाेनाें ने प्लान कर साेलर पैनल मेन्युफेक्चरिंग कंपनी खाेली। आज इस कंपनी की 398 कराेड़ रुपए की नेटवर्थ है। इनकी कंपनी इंडाे-पाक और बांग्लादेश बाॅर्डर पर बीएसएफ की 600 पाेस्ट के लिए वाटर हीटर ट्रीटमेंट प्लांट इंस्टॉल कर रही है। वहीं अंडमान निकोबार में कंपनी एयरफोर्स स्टेशन पर ग्राउंड माउंटेड साेलर पैनल्स लगा रही है। कंपनी रेजिडेंशियल सेक्टर में गुजरात, राजस्थान, यूपी, एमपी, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र और उत्तराखंड राज्याें में काम कर रही है। वर्तमान में कंपनी में 253 कर्मचारी पे-राेल पर हैं, और 300 से ज्यादा चैनल पार्टनर हैं। मशीन आने में देरी हुई, पिता काे कैंसर डिटेक्ट हुआ…3 साल बाद फिर नई शुरुआत कंपनी के एडवाइजर निखिल बंसल बताते हैं कि अंकित और पंकज ने 2015 में कंपनी शुरू की थी, लेकिन मशीन आने में देरी हाे रही थी। अंकित के पिता प्राे. अश्विनी काे कैंसर डिटेक्ट हुआ। 3 साल अंकित इससे बाहर नहीं आ सका और काम बंद करना पड़ा। 2018 में अहमदाबाद में नई शुरुआत के साथ फिर से कंपनी खाेली। 20 मेगावाट से साेलर पैनल मेन्युफेक्चरिंग शुरू की, फिर इसकी क्षमता बढ़ाकर 40 मैगावाॅट कर दी। ईपीसी यानी इंजीनियरिंग, प्राेक्याेरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन का काम शुरू किया। रेजिडेंशियल के साथ कॉमर्शियल प्लेसेज पर साेलर पैनल लगाना शुरू किया। 2022 में सरकारी टेंडर लेने शुरू किया। ईपीसी में फायदा ज्यादा था, जबकि मेन्युफेक्चरिंग में कम मार्जिन था। इसलिए मेन्युफेक्चरिंग बंद कर इसका सारा पैसा ईपीसी में लगा दिया। निखिल ने बताया कि वे भी आईआईटीयन हैं और अंकित के सीनियर हैं। विशेष बात – अब आईपीओ के लिए लिस्टेड हुई कंपनी | अंकित की कंपनी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग के लिए लिस्टेड हुई है। कंपनी प्रधानमंत्री नेट जीराे मिशन में भी अहम भूमिका निभा रही है। एक आईपीओ में अलग-अलग कैटेगरी के निवेशकाें के लिए कुछ शेयर रिजर्व हाेते हैं, जैसे कि रिटेल निवेशक, एंकर निवेशक, बैंक या म्यूचुअल फंड जैसे क्वालिफाइड इंस्टीट्शूनल इंवेस्टर्स शामिल हैं। शेयर मार्केट एक्सपर्ट सीए दिव्या साेमानी बताती हैं कि शेयर मार्केट में पैसा लगाने वाले नए आईपीओ की तलाश में रहते हैं।

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