यूनिवर्सिटी द्वारा जारी आदेशों के बावजूद एमपीपीजी कॉलेज में छात्रों से विकास शुल्क के नाम पर की जा रही कथित अवैध वसूली को लेकर गुरुवार को एनएसयूआई ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। संगठन का आरोप है कि 9 जनवरी को यूनिवर्सिटी की ओर से परीक्षा आवेदन प्रोसेस और फीस को लेकर साफ निर्देश जारी किए गए थे, इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन छात्रों पर अतिरिक्त राशि जमा कराने का दबाव बना रहा है। इस वसूली से खास तौर पर गरीब और मध्यम वर्गीय छात्र-छात्राएं परेशान हो रहे हैं, जिन्हें पढ़ाई के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी झेलना पड़ रहा है। प्रिंसिपल कक्ष के बाहर तालाबंदी एनएसयूआई के कार्यकारी जिलाध्यक्ष संजय राव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र कॉलेज परिसर में एकत्र हुए और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। गुस्साए छात्रों ने प्रिंसिपल ऑफिस के बाहर चैनल गेट पर ताला लगा दिया और विरोध दर्ज कराया। करीब ढाई घंटे तक तालाबंदी जारी रही। बाद में कॉलेज प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलने के बाद ही ताला खोला गया। इस दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि जब तक छात्रों के हितों से जुड़ा मामला हल नहीं होगा, तब तक संगठन चुप नहीं बैठेगा। लिखित ज्ञापन सौंपकर रखी मांगें विरोध प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई की ओर से प्राचार्य को एक लिखित ज्ञापन भी सौंपा गया। ज्ञापन में बताया गया कि यूनिवर्सिटी के आदेश के अनुसार परीक्षा फॉर्म कॉलेज में जमा कराने की कोई जरूरत नहीं थी और फॉर्म अपने आप स्वीकार किए जाने थे। इसके बावजूद सेमेस्टर सिस्टम लागू होने के नाम पर छात्रों से दो बार 300 रुपए विकास शुल्क वसूला जा रहा था। संगठन ने इसे पूरी तरह अवैध बताते हुए मांग की कि अब तक वसूली गई राशि छात्रों को वापस की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। आंदोलन तेज करने की चेतावनी एनएसयूआई जिला उपाध्यक्ष अंकुश आदिवाल ने कहा कि यदि कॉलेज प्रशासन ने जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की और छात्रों को राहत नहीं दी, तो संगठन यूनिवर्सिटी स्तर पर शिकायत करेगा और उच्च शिक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपेगा। इसके साथ ही उग्र छात्र आंदोलन भी किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन की होगी। एनएसयूआई नेताओं ने कहा कि छात्र हितों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 15 दिन में निर्णय का आश्वासन एनएसयूआई के अध्यक्ष संजय राव ने बताया कि संगठन की मुख्य मांग यह थी कि विकास शुल्क के नाम पर की जा रही दोहरी वसूली तुरंत बंद की जाए। बातचीत के दौरान प्राचार्य ने आश्वासन दिया कि 15 दिन के भीतर विकास समिति की बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर फैसला लिया जाएगा। तब तक के लिए विकास शुल्क की वसूली पर रोक लगा दी गई है। इस आश्वासन के बाद एनएसयूआई ने फिलहाल अपना धरना समाप्त किया। प्रदर्शन में यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई के कई पदाधिकारी व बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर छात्र हितों की लड़ाई लड़ने का संकल्प दोहराया।


