विजयदशमी पर रावण का किया जाता है पूजन:सतना में पुजारी ने कहा- एक भूल से रावण की अच्छाई नहीं भुला सकते

सतना के सतना के कोठी कस्बे में एक अनूठी परंपरा निभाई जाती है। यहां रावण का दहन नहीं, बल्कि विधि-विधान से उनका पूजन किया जाता है। ढोल-नगाड़ों के साथ लंकेश की जय-जयकार की जाती है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि रावण एक महान ज्ञानी थे। उनकी एक भूल के कारण उनकी सभी अच्छाइयों को भुलाया नहीं जा सकता। इसी कारण वे उन्हें अपना वंशज मानते हैं और उनका पूजन करते हैं। पुजारी रमेश मिश्रा के अनुसार, यह प्रतिमा वर्षों पुरानी है। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि लगभग 15 साल पहले जब नए थाना भवन का निर्माण होना था, तब उन्हें रात में स्वप्न आया कि कोई प्रतिमा तोड़ रहा है। सुबह जब वे निर्माण स्थल पर पहुंचे तो जेसीबी लगी हुई थी। जेसीबी ऑपरेटर ने जब रावण की प्रतिमा पर प्रहार किया, तो वहां से एक सांप निकल आया। इससे ऑपरेटर और मजदूरों में भगदड़ मच गई और काम रोक दिया गया। बाद में थाना भवन का निर्माण स्थल बदल दिया गया। रमेश मिश्रा ने बताया कि रावण महाविद्वान थे, तीनों लोकों के स्वामी और सभी विद्याओं में पारंगत थे। उन्होंने वैदिक पूजा सहित भगवान भोलेनाथ की स्तुति में कई कृतियां लिखीं और ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों को अपनी साधना से प्रसन्न किया था। वे भगवान शिव के अनन्य भक्त और महान पंडित थे। मिश्रा के अनुसार, उनकी एक बुराई की वजह से उनके ज्ञान, तप और लाखों अच्छाइयों को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान ब्रह्मा ने चार वेद और छह पुराणों के बखान के लिए लंकेश को चुना था, क्योंकि उस समय धरती, आकाश और पाताल में उनसे बड़ा कोई विद्वान नहीं था।

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