शहर में विकास कार्यों में देरी और भ्रष्ट कर्मचारियों को हटाने की मांग को लेकर नगर पालिका के पार्षद और पार्षद प्रतिनिधि पिछले 38 दिनों से धरने पर बैठे थे। अधिकारियों से मिले आश्वासन के बाद धरना अस्थायी रूप से खत्म किया गया था, लेकिन 39वें दिन ही वादे पूरे नहीं होने से पार्षदों में फिर नाराजगी बढ़ गई है। धरना खत्म कराने के लिए नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि राकेश शर्मा के साथ पार्षदों की बैठक हुई थी। बैठक में तय हुआ था कि जिन कर्मचारियों पर आरोप हैं, उन्हें हटाया जाएगा और शनिवार से सड़क निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। इसी भरोसे पर पार्षदों ने अपना धरना स्थगित किया था। कर्मचारी नहीं हटे, सिर्फ विभाग बदले पार्षदों का आरोप है कि जिन कर्मचारियों को हटाने की मांग की गई थी, उन्हें हटाने के बजाय केवल उनके विभाग बदल दिए गए और उन्हें नया प्रभार दे दिया गया। इससे पार्षदों में नाराजगी और बढ़ गई है। उनका कहना है कि केवल तबादला करने से व्यवस्था में कोई सुधार नहीं होगा। सड़क निर्माण भी नहीं हुआ शुरू पार्षदों ने बताया कि रामलीला मैदान से माधवगंज चौराहे तक डामरीकरण कार्य शनिवार से शुरू करने का वादा किया गया था, लेकिन मौके पर कोई काम शुरू नहीं हुआ। सड़क की हालत जस की तस बनी हुई है। पार्षद प्रतिनिधि धर्मेंद्र सक्सेना ने कहा कि जिन मुद्दों पर धरना स्थगित किया गया था, उन पर कोई अमल नहीं हुआ। न तो दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई और न ही सड़क निर्माण शुरू किया गया। इससे साफ है कि प्रशासन ने केवल आश्वासन देकर आंदोलन रुकवाया। पैदल मार्च का ऐलान अब पार्षदों ने विदिशा से भोपाल तक पैदल मार्च कर मुख्यमंत्री निवास (सीएम हाउस) पहुंचने का फैसला लिया है। वे अपनी मांगों को लेकर सरकार से सीधी कार्रवाई की मांग करेंगे। पार्षदों का कहना है कि जब तक दोषी कर्मचारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती और सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।


