विदिशा में शहर के मुख्य खेल स्टेडियम को हेलीपैड में बदलने की तैयारी का खिलाड़ियों और युवाओं ने विरोध किया है। उन्होंने इस संबंध में सोमवार को कलेक्टर अंशुल गुप्ता को ज्ञापन सौंपा है। खिलाड़ियों का कहना है कि यह निर्णय खेल और खिलाड़ियों के भविष्य पर सीधा हमला है। यह विरोध ऐसे समय में सामने आया है जब प्रशासन सांसद खेल महोत्सव और खेलो एमपी जैसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं को खेलों के लिए प्रोत्साहित करने का दावा कर रहा है। खिलाड़ियों ने सरकारी दावों पर सवाल उठाए हैं। खिलाड़ियों ने 2015 में जारी शासन के मुख्य सचिव के आदेश का हवाला दिया। इस आदेश में खेल मैदानों पर किसी भी प्रकार के राजनीतिक, सामाजिक या सांस्कृतिक आयोजनों पर स्पष्ट रूप से रोक लगाई गई है। उनके अनुसार, स्टेडियम को हेलीपैड बनाना इन नियमों का खुला उल्लंघन है। वैकल्पिक स्थलों का सुझाव भी दिया
खिलाड़ियों ने तर्क दिया कि 12 जनवरी से ‘खेलो एमपी’ प्रतियोगिताएं शुरू होने वाली हैं। इसके अलावा, बड़ी संख्या में युवा पुलिस भर्ती के फिजिकल टेस्ट की तैयारी इसी मैदान पर कर रहे हैं। यदि स्टेडियम को हेलीपैड और सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित किया जाता है, तो इन युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा। ज्ञापन में खिलाड़ियों ने प्रशासन को वैकल्पिक स्थलों का सुझाव भी दिया। उन्होंने बताया कि नई मंडी परिसर और एस.ए.टी.आई. कॉलेज का उपयोग पहले भी अतिविशिष्ट व्यक्तियों के हेलिकॉप्टर उतरने के लिए किया जा चुका है। खिलाड़ियों ने सवाल किया कि फिर स्टेडियम को ही क्यों चुना जा रहा है। खिलाड़ियों और युवाओं ने प्रशासन से मांग की कि कड़ी मेहनत से तैयार किए गए खेल मैदान को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जाए और हेलीपैड के लिए अन्य विकल्पों पर विचार किया जाए।


