विदेश जाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी और फर्जी एजेंटों के जाल से बचाने के लिए बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित राजकीय आईटीआई कॉलेज में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम (RSLDC) और विदेश मंत्रालय (भारत सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। इसमें युवाओं को बताया गया कि विदेश जाने का रास्ता ‘शॉर्टकट’ नहीं, बल्कि ‘सही’ होना चाहिए। फर्जीवाड़े से बचें: केवल अधिकृत माध्यम ही चुनें शिविर के दौरान विशेषज्ञों ने आगाह किया कि कई बार युवा जल्दबाजी में अवैध एजेंटों के झांसे में आकर अपनी जमा-पूंजी और भविष्य दोनों दांव पर लगा देते हैं। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि: विदेश में रोजगार केवल सरकारी मान्यता प्राप्त (e-Migrate) एजेंसियों के माध्यम से ही खोजें। बिना पुख्ता जांच के किसी भी व्यक्ति को पासपोर्ट या नकद राशि न सौंपें। फर्जी वादों के कारण न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि दूसरे देश में कानूनी मुश्किलों और जेल तक की नौबत आ सकती है। डॉक्युमेंटेशन पर दिया जोर शिविर में मौजूद मुख्य वक्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्र के अनुभव साझा कर युवाओं को जागरूक किया। राजेश मीना प्रबंधक, RSLDC व रमेश सांभरिया अतिरिक्त प्रबंधक ने विभाग की योजनाओं और सुरक्षित माइग्रेशन की बारीकियों को समझाया। महेंद्र कुमार वर्मा उप निदेशक, तकनीकी शिक्षा ने स्किल ट्रेनिंग के साथ कानूनी दस्तावेजों के महत्व पर जोर दिया। पुलिस विभाग के डिप्टी गोपीचंद मीना ने ठगी से बचने के कानूनी पहलुओं और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में बताया। शिविर में प्रशिक्षणार्थियों और आम नागरिकों को वीज़ा की श्रेणियों, पासपोर्ट बनवाने की सही प्रक्रिया, रोजगार अनुबंध (Contract) को पढ़ने के तरीके और विदेश में रहने के दौरान जरूरी सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।


