राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने विदेश मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी नाराजगी जताई है। बेनीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि उनके मंत्रिमंडल के वरिष्ठ मंत्री डॉ. एस. जयशंकर सांसदों को मिलने का समय नहीं देते, वहीं विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह की स्थिति इतनी बेबस है कि उनके कहने पर संसद भवन स्थित उनके कार्यालय में पीड़ितों के प्रवेश पास तक नहीं बन पा रहे हैं।
मुलाकात का समय मिलने के बावजूद नहीं बने पास सांसद बेनीवाल ने बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान धोखाधड़ी का शिकार होकर रूसी सेना में फंसे भारतीय नागरिकों के परिजनों का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली आया हुआ था। इन पीड़ितों की समस्याओं को लेकर विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के कार्यालय से दोपहर एक से दो बजे के बीच मुलाकात का समय तय किया गया था। लेकिन जब सांसद इन पांच परिजनों के साथ संसद भवन की पास शाखा पहुंचे, तो वहां मौजूद अधिकारियों ने पास बनाने से साफ इनकार कर दिया। अधिकारियों का तर्क था कि राज्य मंत्री के संदेश या निर्देश पर उनके कार्यालय में आने के लिए संसद परिसर के पास जारी नहीं किए जा सकते।
लोकतांत्रिक व्यवस्था और जवाबदेही पर उठाए सवाल बेनीवाल ने इस घटना को न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बताया बल्कि इसे विदेश राज्य मंत्री की लाचारी का प्रतीक करार दिया। उन्होंने तीखे लहजे में सवाल किया कि जिस मंत्री के अधिकार क्षेत्र में अपने कार्यालय में आगंतुकों को बुलाने की शक्ति नहीं है, उनसे देश के महत्वपूर्ण विदेशी मामलों को सुलझाने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिक संकट के समय अपनी सरकार और विदेश मंत्रालय की ओर ही देखते हैं, लेकिन जब मंत्रालय सांसदों के साथ आए पीड़ितों से ही दूरी बना लेगा, तो आम जनता अपनी गुहार लेकर कहां जाएगी।


