विधानसभा:सात महीने में लाड़ली बहना ​के प्रचार पर ही खर्च हो गए 120 करोड़ रुपए

इसका भी जवाब मांगा गया कि 1000 से बढ़कर 3000 रुपए कब होगी योजना की राशि मप्र में 2023 के विधानसभा चुनाव में कथित तौर पर निर्णायक भूमिका निभाने वाली स्कीम ‘लाड़ली बहना’ के प्रचार पर तत्कालीन भाजपा सरकार ने 119 करोड़ 98 लाख रुपए खर्च किए थे। विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल पर सरकार ने यह जवाब दिया है। कम समय में किसी भी नई स्कीम के प्रचार पर संभवत: पहली बार इतनी बड़ी राशि अप्रैल 2023 से अक्टूबर 2023 के बीच खर्च की गई। यह राशि प्रचार के सभी माध्यमों से जुड़ी है। ग्रेवाल ने अपने सवाल में यह भी पूछा कि प्रचार के दौरान लाड़ली बहना की राशि को बढ़ाकर आगे 1000 रुपए से 3000 रुपए किया जाएगा, विज्ञापन में इसका उल्लेख क्यों किया गया। साफ है कि अभी भी विपक्ष बार-बार सरकार को इसी बात पर घेर रहा है कि कब लाड़ली बहनों की राशि भाजपा की घोषणा के मुताबिक 3000 रुपए होगी। अभी लाड़ली बहनों को 1250 रुपए प्रतिमाह उनके खाते में डाले जा रहे हैं। ग्रेवाल ने लाड़ली बहना के एक विज्ञापन पर पूर्व विधायक पारस सकलेचा के एक पत्र का भी सवाल किया। इसमें पूछा कि सकलेचा ने लाड़ली बहना के विज्ञापनों पर जुड़ा सवाल 31 जुलाई 2023 को किया था। इस पत्र पर क्या कार्यवाही की गई है। सरकार ने ​सकलेचा के ऐसे किसी भी पत्र के होने की जानकारी से मना किया है। यहां बता दें कि ग्रेवाल ने पिछले सत्र में यह सवाल किया था, जिसका पूर्ण उत्तर दिसंबर माह के शीतकालीन सत्र में पटल पर रखा गया। पूर्व विधायक का पत्र पात्र महिलाओं को वंचित किया,पंजीयन नहीं हो रहे सकलेचा ने पत्र में पूछा था कि सरकार ने इस लाड़ली बहना योजना को सतत् प्रवृत्ति की स्कीम बताया था। जब ऐसा था तो 20 अगस्त 2023 के बाद जो महिलाएं स्कीम की पात्र बनीं, उनके पंजीयन क्यों नहीं हो रहे। राज्य धन यदि स्कीम में बंट रहा है तो बाकी महिलाओं का भी इस पर हक है। सकलेचा ने कहा कि सरकार को पंजीयन शुरू करना चाहिए। क्योंकि जब आप 60 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को स्कीम से बाहर कर रहें, 250 रुपए अतिरिक्त दे रहे या जिन की मृत्यु हो गई है, उनके नाम हटाए जा रहे हैं तो पात्र होने वाली महिलाओं का पंजीयन क्यों नहीं हो रहा। पूर्व विधायक का कहना है कि इस पत्र पर सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया। वे यह कह रहे हैं कि पत्र ही नहीं मिला।

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