मप्र विधानसभा के 69 साल पूरे होने पर बुधवार को विधानसभा का विशेष सत्र आहूत किया गया। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर अब तक रहे 17 मुख्यमंत्रियों और उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने पहले सीएम पंडित रविशंकर शुक्ल से लेकर सबसे लंबे कार्यकाल वाले शिवराज सिंह चौहान तक की कार्यशैली और उपलब्धियों का उल्लेख किया। इनमें भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के मुख्यमंत्री शामिल रहे। जब मौजूदा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बारी आई, तो विजयवर्गीय का अंदाज बदला। उन्होंने कहा- ‘मौजूदा युग मोहन यादव जी का है। अभी टी-20 क्रिकेट चल रहा है। जैसे कप्तान सूर्यकुमार मैदान में उतरते ही खिलाड़ियों को किट बांटते हैं, वैसे ही हमारे कप्तान हैं। फर्क बस इतना है कि हमारे कप्तान खुद सूट-बूट में आ गए हैं। हम सब गरीब ऐसे ही बैठे हैं।’ इतना कहते ही सदन में ठहाके गूंज उठे। विपक्ष की ओर से विधायक महेश परमार ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह किट पूरे 230 विधायकों को मिलनी चाहिए। विजयवर्गीय ने औद्योगिक विकास के लिए मोहन के प्रयासों की भी सराहना की। शिवराज की योजनाएं देश में फैली, नाथ अच्छे प्रशासक शिवराज चौहान (2005-18, 2020-23) शिवराज की योजनाओं की देश नकल कर रहा है। चाहे लाड़ली लक्ष्मी, लाड़ली बहना, जननी एक्सप्रेस या सीएम कन्यादान योजना हो। महाकाल लोक व एकात्म धाम उन्हीं की देन है। कमलनाथ (2018-20) कमलनाथ में जबरदस्त प्रशासनिक क्षमता थी। उन्होंने ही औद्योगिक निवेश बढ़ाने को सिंगल विंडो शुरू की। उनके पास बहुत सारी योजनाएं थी, पर समय कम था। वे उतना नहीं कर पाए। उमा भारती (2003-04) उमा की सलाह पर एमपीआरडीसी का गठन किया गया। इसके बाद 10 हजार करोड़ रुपए की सड़कें बनाईं। भारी विरोध के बावजूद उमा ने हरसूद खाली कराया। तब इंदिरा सागर बांध पहली बार भरा। दिग्विजय सिंह (1993-2003) संजय गांधी थर्मल पॉवर प्लांट, बाणसागर बांध उन्हीं के प्रयासों से बना। कोलार जल परियोजना में भी उन्हीं के प्रयास थे। दिग्विजय से राजनीतिक सौजन्यता सीखनी चाहिए। किस मुख्यमंत्री का क्या योगदान?
पंडित रविशंकर शुक्ल : नियोगी आयोग का गठन किया, प्रदेश में धर्मांतरण रोकने की दिशा में कदम उठाए। कैलाशनाथ काटजू : वल्लभ भवन का निर्माण कराया। द्वारिका प्रसाद मिश्रा : प्रदेश में कई विश्वविद्यालयों की स्थापना की, राजनीति में रणनीतिक भूमिका निभाई। गोविंद नारायण सिंह : रीवा में एपीएस यूनिवर्सिटी और विंध्य क्षेत्र में बाणसागर बांध को मंजूरी दिलाई। राजा नरेशचंद्र : मध्यप्रदेश के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री रहे। श्यामाचरण शुक्ल : प्रदेश में शहरीकरण को बढ़ावा दिया। एम.एन. बुच : प्रशासन को स्वतंत्र निर्णय लेने का अवसर दिया। प्रकाशचंद्र सेठी : कानून व्यवस्था सुदृढ़ की, चंबल में डकैतों के आत्मसमर्पण की पहल की। कैलाश जोशी : ग्रामीण विकास की नींव रखी। वीरेंद्र कुमार सकलेचा : नर्मदा घाटी विकास कार्यों को आगे बढ़ाया। अर्जुन सिंह : कला, संस्कृति और विरासत के संरक्षण के साथ प्रशासनिक दक्षता दिखाई। मोतीलाल बोरा : संवेदनशील और मेहनती प्रशासन के लिए जाने गए। सुंदरलाल पटवा और बाबूलाल गौर : अतिक्रमण हटाने और कानून व्यवस्था मजबूत करने पर काम किया। सीएम ने कहा – 3000 रुपए की बात मत करो, हम लाड़ली बहना को 5 हजार तक ले जाएंगे विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विपक्ष को लाड़ली बहनों की चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष जहां 3000 रुपए देने की बात कर रहा है। लेकिन हमारी सरकार लाड़ली बहनों को आगे चलकर 5000 रुपए तक सहायता देगी। इसी तरह बेरोजगारी पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पास 2047 तक का रोडमैप है। उन्होंने बताया कि सरकारी विभागों में एक साल के भीतर एक लाख और पांच साल में ढाई लाख पदों पर भर्ती की जाएगी। नेता प्रतिपक्ष द्वारा 2026 की गारंटी मांगे जाने पर सीएम ने कहा कि सरकार के पास अपने संकल्प पत्र के वादों को 2028 तक पूरा करने का समय है। वह तय समय पर इन्हें पूरा करेगी।


