लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने विधानसभा के काम में भी घोटाला कर दिया। विधानसभा में साउंड और नेटवर्किंग सिस्टम के लिए की जून 2023, सितंबर 2023 और अक्टूबर 2023 में की गई खरीद में गड़बड़ी की गई। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल से सामान 6 गुना महंगे दामों पर खरीदा गया, जबकि वही सामान बाजार में काफी कम कीमत पर उपलब्ध था। दस्तावेजों के अनुसार, 2023 में कुल 26 आइटम खरीदे गए। तीनों खरीद में गड़बड़ी हुई। इससे सरकार को 48 लाख रु. का नुकसान हुआ। नियमों के मुताबिक, ये सभी काम पीडब्ल्यूडी के एओआर (शेड्यूल ऑफ रेट) में शामिल थे। इन्हें ई-टेंडर पोर्टल से कराया जाना चाहिए था। इसके बावजूद खरीदी GeM पोर्टल से कराई गई। आरोप है कि GeM पर रेट इस तरह तय किए गए, ताकि ज्यादा कीमत को सही ठहराया जा सके। टेंडर कुछ गिनी-चुनी एजेंसियों
टेंडर टेक इंडिया, आकाश इलेक्ट्रिकल, एफबी इलेक्ट्रिकल, सोनी इलेक्ट्रिकल और टेक्नो सॉल्यूशन को दिए गए। आरोप है कि लंबे समय से इन्हीं एजेंसियों को नियमों से इतर काम दिया जा रहा है। SOR में शामिल आइटम के नाम और स्पेसिफिकेशन बदले गए, ताकि मुकाबला खत्म हो जाए और वही एजेंसी ऊंचे दाम पर सप्लाई कर सके। इसके अलावा, 10 लाख रुपए से कम के ऑफलाइन टेंडर भी लगाए गए। टेंडर फिक्सिंग : दिसंबर में करवा दिया काम… फरवरी में उसी कंपनी को टेंडर विधानसभा में नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) प्रोजेक्ट के तहत कराए गए इलेक्ट्रिकल कामों में टेंडर फिक्सिंग के गंभीर आरोप सामने आए हैं। दस्तावेज बताते हैं कि काम पहले करा लिया गया और टेंडर बाद में निकाला गया। दिसंबर 2024 में विधानसभा परिसर में इलेक्ट्रिकल और संबंधित काम पूरे कर दिए गए थे। जनवरी 2025 में 70 लाख रु. की निविदा GeM पोर्टल पर जारी की गई। जिस काम के लिए टेंडर निकाला गया, उसका बड़ा हिस्सा पहले ही हो चुका था। रिकॉर्ड के मुताबिक 10 जनवरी 2025 को जारी निविदा (GEM/2025/B/5804096) को फरवरी 2025 के आखिरी में फाइनल किया। टेंडर उसी कंपनी टेक्नो सॉल्यूशन प्रा.लि. को दिया गया, जिसने टेंडर जारी होने से करीब दो माह पहले ही विधानसभा में काम कर दिया था।
इसका सीधा सबूत विधानसभा सुरक्षा शाखा का गेट पास नंबर 302 है, जो 13 जनवरी को जारी किया गया था। इसमें दर्ज है कि कंपनी काम पूरा करने के बाद सामग्री वापस ले जा चुकी थी। यह गेट पास पीडब्ल्यूडी शाखा के एसडीओ हेमंत झारिया ने अधिकृत किया था। इससे साफ होता है कि जब जनवरी में टेंडर प्रक्रिया चल रही थी, तब तक काम पूरा हो चुका था। 23 जनवरी 2025 को कॉन्ट्रेक्ट देते समय विधानसभा पीडब्ल्यूडी के ईई अजय श्रीवास्तव पर नियमों की अनदेखी का आरोप है। GeM से जारी टेंडर में पीडब्ल्यूडी में रजिस्टर्ड A-ग्रेड इलेक्ट्रिकल लाइसेंस की शर्त थी, लेकिन टेक्नो सॉल्यूशन प्रा.लि. ने यह लाइसेंस अपलोड नहीं किया, इसके बावजूद उसे टेंडर दे दिया गया। इसके अलावा, NeVA प्रोजेक्ट के ये काम पीडब्ल्यूडी की एसओआर (शेड्यूल ऑफ रेट) के तहत ई-टेंडर से होने चाहिए थे, लेकिन पूरे काम के लिए GeM पोर्टल का इस्तेमाल किया गया और रेट मनमाने तय किए गए। मामले से जुड़े सभी अहम दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें खरीदे गए आइटम की सूची, एसओआर की कॉपी, PMO और लोकायुक्त को की गई शिकायत, विधानसभा का गेट पास, सामान की आवक-जावक की स्लिप और टेंडर की कॉपी शामिल हैं। ये दस्तावेज साफ साबित करते हैं कि काम पहले कराया गया और टेंडर बाद में निकाला गया। पीएमओ ने भी पत्र भेजा
मामले की शिकायत लोकायुक्त भोपाल व प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक की गई है। वहां से जांच के लिए विभाग को पत्र भी भेजा गया है, पर कार्रवाई नहीं हुई है।


