राजस्थान विधानसभा में लगाए 2 नए कैमरों को लेकर पहले सदन में और अब बाहर कांग्रेस-बीजेपी में बवाल मचा हुआ है। सदन के भीतर लगाए गए दो कैमरों के कारण मानसून सत्र खत्म होने से ठीक पहले विपक्ष ने मुद्दा बनाया। आखिरी दो दिन कैमरों को लेकर जमकर हंगामा हुआ। दरअसल, विधानसभा में कैमरों से संबंधित दो टेंडर निकाले गए थे। एक टेंडर सदन के अंदर लगे 9 कैमरों को अपग्रेड करने के लिए था, जिसकी प्रक्रिया अभी चल रही है। दूसरा टेंडर हाई क्वालिटी दो कैमरे लगाने का था। इन्हीं दो कैमरों को लेकर सारा विवाद है। विपक्ष इन्हें जासूसी कैमरे कह रहा है। दावा है कि इन कैमरों पर फर्श की पड़ी पिन तक आसानी से देखी जा सकती है। कैमरा बहुत धीमी आवाज भी रिकॉर्ड कर सकता है। दो कैमरों को इंस्टॉल करने और अन्य कामों की कीमत टेंडर में 18.46 लाख तय की गई। आखिर विपक्ष क्यों इन्हें जासूसी कैमरे कह रहा है… विधानसभा के अंदर सदन में दो कैमरे लगाने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) ने टेंडर जारी किया। कागजी प्रक्रिया मार्च, 25 में पूरी हुई। टेंडर शर्तों में सदन में कम्पलीट रिकॉर्डिंग सिस्टम के साथ दो पैन-टिल्ट-जूम (PTZ) कैमरे लगाने को कहा गया। कैमरे में इस तरह की विशेषताएं मांगी गईं… कैमरे की 10 प्रमुख विशेषताएं… तेज चलती कार का भी एक-एक फ्रेम दिखाने में सक्षम 200 प्रति सेकेंड टिल्टिंग (छुकाव) व पैनिंग (घुमाव) का मतलब है कि कैमरा ऊपर से नीचे और दाएं से बाएं काफी तेजी से घूम सकता है। ये क्वालिटी अक्सर रोबोटिक कैमरों में होती है। ये तेज गति को ट्रैक कर सकते हैं। एक बड़े हॉल को ये कैमरे आसानी से कवर कर सकते हैं। ऐसे कैमरे उड़ते पंछी और बहुत तेज गति से चलने वाली कार तक को अच्छे से एक-एक फ्रेम दिखाने में सक्षम होते हैं। धीमी से धीमी आवाज की रिकॉर्डिंग ऐसे कैमरों में केवल वीडियो ही नहीं, ऑडियो सिग्नल प्राप्त करने के लिए भी ऑडियो इनपुट पोर्ट होता है। वीडियो के साथ दूर की और धीमी आवाज भी रिकॉर्ड कर सकता है। कम रोशनी में भी क्वालिटी की वीडियो रिकॉर्डिंग इसके सेंसर की हाई क्लालिटी होती है। इस स्तर के कैमरे कम रोशनी में भी काफी अच्छे क्वालिटी वाले वीडियो रिकॉर्ड करते हैं। वहीं कम रोशनी में रंगों को एकदम सटीक दिखाते हैं। खराब नेटवर्क में भी हाई क्वालिटी रिकॉर्डिंग ऐसे कैमरों को खराब नेटवर्क में भी बेहतरीन गुणवत्ता वाले वीडियो प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस कारण रुक-रुक कर या खराब क्वालिटी के धुंधले वीडियो नहीं मिलते। ऐसे कैमरे दूर का भी शानदार वीडियो बनाते हैं। ये कैमरे एक-एक एक्टिविटी को प्रभावशाली तौर पर ट्रेकिंग के जरिए रिकॉर्ड करते हैं। इसका कारण हैं इनकी पोजिशन, रोटेशन और जूमिंग। इसी कारण हाई क्वालिटी वर्चुअल एक्सपीरियंस देते हैं। कम से कम 2TB इनबिल्ट स्टोरेज इन कैमरों में 2TB का इनबिल्ट स्टोरेज होता है। आम भाषा में कहें तो इतने स्टोरेज में दो-ढाई घंटे की 200 से अधिक फिल्में स्टोर की जा सकती हैं। आसानी से शेयर कर सकते हैं रिकॉर्डिंग एक खासियत यह भी है कि इसमें नेटवर्क अटैच्ड स्टोरेज हाेता है। मतलब ये एक ऐसा डेडिकेटेड स्टोरेज डिवाइस है जो स्थानीय नेटवर्क से सीधे जुड़ता है। कैमरों के जरिए स्टोर की गई रिकॉर्डिंग को दूसरे डिवाइस में साझा या स्टोर की जा सकती हैं। यह एक तरह का मिनी-सर्वर होता है जो फाइलों को स्टोर, शेयर और व्यवस्थित करने का काम करता है। 11 कैमरे तो विवाद सिर्फ 2 को लेकर क्यों? विपक्ष का दावा-स्पीकर करा रहे जासूसी सदन में पहले से लगे 9 कैमरों को अपडेट कराने के लिए अगस्त में ही टेंडर प्रक्रिया पूरी हुई है। हालांकि इन्हें अपग्रेड करने का काम अभी शुरू नहीं हुआ है। पुराने 9 कैमरे अपग्रेड होने के बाद वैसे ही फीचर से लैस होंगे, जेसे ताजा लगे 2 कैमरे। विवाद सिर्फ नए लगाए 2 कैमरों को लेकर है। इस बारे में विपक्ष का कहना है कि 9 कैमरों का एक्सेस कंट्रोल रूम में है। इससे टीवी पर सदन की कार्यवाही लाइव होती है। यू-ट्यूब पर भी यहीं से फीड जाता है। वहीं, नए लगे दो नए कैमरों को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने दावा किया कि इनका एक्सेस कंट्रोल रूम में नहीं है, बल्कि विधानसभा स्पीकर ने अपने चैम्बर के भीतर बने रेस्ट रूम में इनका एक्सेस सेट कर रखा है। जिससे कि सदन स्थगित करने के बाद विपक्ष के विधायकों की आवाज सुन सकें। विधानसभा स्पीकर जासूस बनकर हमारी तरफ कैमरे लगवा रहे हैं। जुली और डोटासरा का दावा है कि मुद्दा उठने के बाद अब वहां से वायरिंग हटाई जा रही है। जासूसी के सबूत मिटा रहे हैं। जूली ने सदन में कहा था कि 15 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित कर दीजिए। मैं चल कर बता दूंगा कि कहां से पूरा नेटवर्क चल रहा है। स्पीकर का दावा- दोनों कैमरों में नहीं होती ऑडियो रिकॉर्डिंग ऑडियो रिकॉर्ड के विपक्ष के दावे पर विधानसभा में स्पीकर और सरकारी मुख्य सचेतक ने कहा है कि विपक्ष की तरफ लगाए गए दोनों कैमरों से ऑडियो रिकॉर्डिंग नहीं होती। जबकि नेता प्रतिपक्ष ने टेंडर डॉक्यूमेंट में ऑडियो रिकॉर्डिंग वाले कैमरे खरीदने का दावा किया। …. कैमरों से जासूसी के विवाद से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान-कांग्रेस की महिला विधायक बोलीं-स्पीकर हमारी निजी बातें सुनते हैं:महिलाएं सदन तक में सुरक्षित नहीं, प्राइवेसी क्या बेडरूम-बाथरूम तक ही रहेगी दो जासूसी कैमरों से स्पीकर और मंत्री हमारी रिकॉर्डिंग देखते हैं। हमारी निजी बातें सुनते हैं। कैमरों से हमारी निजता का हनन हो रहा है। दोनों महिला विधायक सोमवार को पीसीसी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत कर रही थीं। पूरी खबर पढ़िए…


