विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सोमवार को पटना में ‘85वीं अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन’ में शामिल हुए। उन्होंने ‘संवैधानिक मूल्यों को सशक्त बनाए रखने में संसद एवं राज्य विधान मंडलों के योगदान’ पर कहा कि संसद और विधान मंडलों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व डिजिटल तकनीकों से लैस करना, जनप्रतिनिधियों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना और जनता तक उनकी पहुंच बढ़ानी होगी। जनता का विश्वास अर्जित कर संसद और विधान मंडलों को अधिक उत्तरदायी बनाना ही देश के समग्र विकास की कुंजी है। सिंह ने कहा कि भारत के संविधान के 75वें वर्ष में यह संतोषजनक है कि हजारों वर्षों की गुलामी से उबरकर भारत एक आत्मनिर्भर राष्ट्र बना है। अगले 25 वर्षों में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने हेतु संसद और विधान मंडलों को प्रमुख योगदान देना होगा। सिंह ने संविधान, संसद और विधान मंडलों के महत्व को उजागर किया और देश के विकास में इनके भविष्य के योगदान की दिशा को रेखांकित किया। साथ ही देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए युवा और महिलाओं को अधिकाधिक आत्मनिर्भर बनाना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद हमने संसदीय लोकतंत्र को अपनाया। सामान्य तौर पर यही कहा जाता है कि यह व्यवस्था हमने ब्रिटेन से ली है, लेकिन भारत में संविधान के आधार पर शासन भी अंग्रेजों की देन नहीं है। भारत में वैदिक काल से सभा, समिति एवं गण जैसी परामर्शदात्री संस्थाओं का अस्तित्व रहा है। भारत में महाजनपद काल में वज्जिसंघ भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करते थे। सभा और नगरम जैसी पंचायतें और म्युनिसिपल कॉरपोरेशन संस्थाएं भी संचालित रहीं। सफलता के पीछे जनता की ताकत डॉ. सिंह ने कहा कि संविधान की सफलता के पीछे भारतीय जनता की शक्ति है। संसद और विधान मंडलों ने संविधान के उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमेशा महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इनका प्रमुख दायित्व देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना है। वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने भारत की अखंडता को बनाए रखने के लिए अलग विधान से संचालित कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त कर संसद ने भारत की एकता और अखंडता को सशक्त बनाने में बड़ा योगदान दिया है।


