विधायक मनीष यादव से पूछा- ‘दुल्हन कब लाओगे’:मंत्रीजी ने कलेक्टर से कहा-‘कहना क्या चाहते हो?’; दीवार फांदकर हॉस्टल में घुसे राजेंद्र गुढ़ा

नमस्कार पूर्व मंत्रीजी दीवार फांदकर जयपुर के राजपूत छात्रावास में घुस गए। सीकर में कलेक्टर साहब की टोका-टाकी से परेशान होकर वनमंत्रीजी गुस्से में आग-बबूला हो गए। जयपुर के शाहपुरा से कांग्रेस विधायक से पत्रकार ने पूछ लिया-दुल्हन कब लाओगे? राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. दीवार फांदकर हॉस्टल पहुंचे पूर्व मंत्री वे राजेंद्र गुढ़ा हैं। जान हथेली पर रखकर लाल डायरी निकाल लाए थे। हालांकि उसमें क्या विस्फोटक निकला इसके बारे में ज्यादा जानकारी है। वे थाने की दीवार पर चढ़ जाते हैं। बांध की दीवार पर चढ़कर पानी में कूद जाते हैं। जयपुर में जब राजपूत छात्रावास के वार्डन को पता चला कि राजेंद्र गुढ़ा आ रहे हैं तो उसने मेन गेट पर ताला लगा दिया। वार्डन शायद जानता था कि गुढ़ा सीधे तरीके से आने के आदी नहीं है। यही हुआ भी। गेट पर ताला देख गुढ़ा जी छात्रों के सहयोग से एक गुमटी पर चढ़े। दीवार चढ़कर छत पर पहुंचे। इसके बाद सीढ़ी से छात्रावास के चौक में उतर गए। लैंडिंग होते ही जिंदाबाद के नारे लगे। इसके बाद गुढ़ा जी ने संबंधित जिम्मेदार को फोन कर ढंग से लपकाया। कहा- हॉस्टल तुम्हारे पिताजी का नहीं है जो यहां ताला लगा दिया। इसके बाद गुढ़ा जी ने छात्रावास का मुआयना किया। फिर कहा कि 40 साल में कुछ नहीं बदला। सब कुछ वैसा का वैसा है। सुविधाओं पर कोई काम नहीं किया गया। 2. सीकर में मंत्रीजी ने कलेक्टर को झाड़ा ‌वे वन मंत्री हैं। उनका नाम संजय शर्मा है। वे हंसमुख हैं। सीकर में उन्हें कलेक्टर पर गुस्सा आ गया। नेता को अफसर पर गुस्सा आना स्वाभाविक है। हुआ यूं कि मंत्रीजी कैंप में पहुंचे थे। कुर्सियां खालीं। कलेक्टर का पता नहीं। एक कर्मचारी से कामों की लिस्ट मांगी तो वह मोबाइल में दिखाने लगा। इतने में कलेक्टर महोदय भी पहुंच गए। मंत्रीजी ने कलेक्टर से शिकायत की तो वे कर्मचारियों की तरफदारी करने लगे। यहीं से मामला बिगड़ गया। मंत्रीजी चिल्लाकर बोले-आप कहना क्या चाह रहे हो..मैं गलत आ गया यहां पर? क्या कहना क्या चाह रहे हो? कलेक्टर ने मंत्रीजी को सफाई देने की बहुत कोशिश की। लेकिन वे भड़क उठे- आप क्यों हस्तक्षेप कर रहे हो। मैं जनता को सीधे सुन रहा हूं। इसके बाद उन्होंने हाथ में लिए दस्तावेज टेबल पर फेंक दिए और खड़े हो गए। बोले- जैसे मर्जी कैंप को चलाओ। मैं तो चला। अब सीएम से बात करूंगा। इसके बाद वे चले गए। इस वाकये का वीडियो भी सामने आ गया। डोटासरा जी को मौका मिल गया। उन्होंने वीडियो लपका और अपने सोशल मीडिया पर उसे पोस्ट करके लिखा- ये तस्वीरें सुशासन की पोल खोल रही हैं। दो जिम्मेदारों के बीच संवाद असहज दिख रहा है। 3. विधायक से पूछा-दुल्हन कब लाओगे मुद्दा अरावली का चल रहा था। अरावली ने बहुत कुछ दिया। जंगल, पानी, हवा। इन दिनों अरावली मुद्दा और चमकने का मौका दे रही है। मुद्दे की बहती गंगा में कई ‘तिर जाने’ को तैयार बैठे हैं। युवाओं में खासा जोश है। कांग्रेस के युवा विधायक ने भी अरावली के मुद्दे को जन्मदिन पर भुनाया और सारे मुद्दे की हवा को एक बड़े से गुब्बारे में भरकर उनके समर्थकों ने हवा में उड़ा दिया। विशाल आकार का गुब्बारा दूर से नजर आया। इसके एक तरफ अरावली बचाने का संदेश था। दूसरी तरफ विधायकजी की तस्वीर के साथ जन्मदिन की बधाई दी गई थी। एक पंथ दो काज। अच्छा माहौल बन गया। जन्मदिन का जन्मदिन और आंदोल का आंदोलन। गुब्बारे के साथ ही विधायक जी भी हवा में थे। एक पत्रकार ने उन्हें पकड़ लिया। लीक से हटकर सवाल पूछा- दुल्हन कब लाओगे? अब अरावली और दुल्हन का क्या कनेक्शन? लेकिन पूछ लिया तो पूछ लिया। युवा विधायक ने सहजता से कहा- बड़े-बूढ़ों ने कहा है, शादी ब्याह की बातें जोग-संजोग से होती हैं। जब संजोग बैठेगा हो जाएगी। बात तो सही है। शादी कोई गुब्बारा नहीं जिसकी बातें हवा में हों। 4. चलते-चलते सांसद महोदय एक शादी समारोह में पहुंचे। वहां एक बुजुर्ग बाबा मिल गए। पगड़ी बांधे हुए थे। काली जैकेट पहनी थी। चौकड़ी बांधे सांसदजी भी उसी तख्त पर बैठ गए जिस पर बाबाजी बैठे थे। बाबाजी ने कहा- आप जिस तरह चल रहे हो ना… सांसद महोदय एकबारगी असहज हुए। सोचा कि बाबा चाल-चलन की बात कर रहे हैं। सांसद जी ने बात काटते हुए कहा- जैसे चल रहा हूं ,ऐसे ही चलूंगा। लेकिन बाबाजी का उद्देश्य ठेस पहुंचाना नहीं था। वे दूसरी बात बोल रहे थे। उन्होंने अपनी बात पूरी की- आप जिस तरह चल रहे हो ना, चौगुना हो जाओगे। भविष्य है। आपका समय है। तारीफ भी बाबाजी ने लगभग धमकाने वाला चेहरा बनाते हुए की। इससे संशय हुआ। उधर, सांसद महोदय और उनकी पार्टी का एक खास समर्थक सूरत में मिला। उनका साड़ियों का कारोबार है। उसने निकाय चुनाव को नजदीक देखते हुए RLP के झंडे जैसी साड़ियां मार्केट में उतारी हैं। साड़ियों का रंग हरा है और पल्लू पर बड़ी सी बोतल (चुनाव चिह्न) छपा है। समर्थकों में अब प्रचार को लेकर खास उत्सुकता है। वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…

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