विनय चौबे के कार्यकाल में रहे उत्पाद आयुक्तों से पूछताछ की तैयारी में ईडी

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पीएमएलए के तहत झारखंड में हुए शराब घोटाले की जांच कर रहा है। अब ईडी उन सभी उत्पाद आयुक्तों से भी पूछताछ करेगा, जो तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे के कार्यकाल के दौरान रहे है। इन सभी को ईडी एक एक कर समन कर पूछताछ की तैयारी में है। विनय चौबे के कार्यकाल के दौरान उत्पाद आयुक्त रहने वालों में आईएएस अधिकारी अमित कुमार, आईएएस कमलेश्वर प्रसाद, आईएएस कर्ण सत्यार्थी और आईएएस फैज अक अहमद शामिल है। ईडी ने एसीबी में 20 मई को दर्ज कांड संख्या 09/25 के आधार पर ही 28 नवंबर को पीएमएलए के तहत इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआइआर) 10/25 दर्ज किया है। अब ईडी इस पूरे घोटाले के तह तक जाने की तैयारी में है ताकि इसके पीछे के सूत्रधार कौन है उनका भी पता लग सके। जल्द ही इन्हें समन भेजा जाएगा और रांची स्थिति ईडी कार्यालय में पूछताछ की जाएगी। कौन कबतक रहे उत्पाद आयुक्त के पद {आईएएस अमित कुमार 04 अगस्त 2021 से 10 जुलाई 2022 तक आयुक्त उत्पाद थे। {आयुक्त आईएएस कमलेश्वर प्रसाद सिंह का कार्यकाल जुलाई से दिसंबर 2022 तक रहा। {आईएएस कर्ण सत्यार्थी का कार्यकाल उत्पाद आयुक्त के पद पर चार महीने का रहा। {फैज अक अहमद का कार्यकाल अगस्त 2023 से मार्च 2024 तक रहा। घोटाला कब शुरू हुआ, कब आया सामने व क्या हुई कार्रवाई, जानेगा ईडी ईडी उत्पाद विभाग में विनय चौबे के कार्यकाल के दौरान पदस्थापित उत्पाद आयुक्त से यह जानना चाहता है कि झारखंड में शराब घोटाले की शुरुआत हुई। शराब घोटाला का खुलासा मई 2025 में ही क्यों हुआ। जबकि घोटाला लंबे समय से चल रहा था। झारखंड में नई उत्पाद नीति 2022 में लागू हुई थी। उसी दौरान शराब घोटाला की शुरुआत हुई थी। प्लेसमेंट एजेंसियों ने फर्जी बैंक गारंटी लेकर ठेका लिया। अधिकारियों ने अपने चहेते कंपनियों को ठेका दिलाया। फिर देर क्यों हुई। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 20 मई 2025 को प्राथमिकी दर्ज कार्रवाई शुरू की। उत्पाद विभाग के तत्कालीन सचिव विनय चौबे, तत्कालीन संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह सहित विभाग के अन्य अधिकारी व प्लेसमेंट एजेंसियों के निदेशकों की गिरफ्तारी हुई। एसीबी को अनुसंधान में जानकारी मिली कि यह घोटाला सिर्फ 38 करोड़ का नहीं, बल्कि 200 करोड़ रुपए से भी ज्यादा का हो सकता है। अब ईडी अनुसंधान कर जानना चाहती है कि यह घोटाला वास्तव में कितने करोड़ का के है। ईसीआईआर दर्ज होने के बाद तीन से पूछताछ कर चुका है ईडी ईडी शराब घोटाला मामले में ईसीआईआर दर्ज करने के बाद प्लेसमेंट एजेंसी विजन हॉस्पिटेलिटी सर्विसेज एंड कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के तीन निदेशकों से बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में पूछताछ कर चुकी है। इनमें परेश अभेसिंह ठाकोर, विक्रमासिंह अभेसिंह ठाकोर और महेश शिडगे शामिल हैं। तीनों गुजरात के रहने वाले हैं। इन्हें एसीबी ने 14 अक्टूबर को शराब घोटाला में अहमदाबाद से गिरफ्तार किया था। उक्त एजेंसी ने फर्जी बैंक गारंटी देकर मैनपॉवर सप्लाई का ठेका लिया। अब इनके बयान पर ही ईडी की कार्रवाई आगे बढ़ रही है। ईडी न इनसे पूछताछ में यह जानकारी ली है कि इन लोगो ने कैसे फर्जी बैंक गारंटी विभाग में देकर मैन पॉवर सप्लाई का काम लिया। किन अधिकारियों ने उन्हें सहयोग किया।

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