विवादों से घिरे अधिकारी की हो सकती है वापसी:चंद्रशेखर बेलचंदन ने प्रतिनियुक्ति के लिए लिखा लेटर, हाईकोर्ट ने भेजा था मूल विभाग

राजनांदगांव के हाउसिंग बोर्ड में विवादों से घिरे अधिकारी चंद्रशेखर बेलचंदन की वापसी हो सकती है। गृह निर्माण मंडल के सूत्रों के अनुसार, चंद्रशेखर बेलचंदन ने अपनी प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है। जो वर्तमान में विचाराधीन है। साल 2015 में जब से बेलचंदन हाउसिंग बोर्ड राजनांदगांव में पदस्थ हुए, तब से विवादों में बने रहे। वे मंडल में प्रतिनियुक्ति में पदस्थ थे। उनके खिलाफ कई शिकायत पत्र अधिकारी-कर्मचारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भी भेजा था। मंडल को निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल करने का आरोप पिछले कार्यकाल में बेलचंदन के खिलाफ कर्मचारियों और सीनियर अधिकारियों ने सैकड़ों शिकायतें की, जो जांच में सही पाई गईं थी। हालांकि, उनके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर वे लगातार स्थगन आदेश प्राप्त करते रहे। कांग्रेस शासनकाल के दौरान उन पर मंडल को निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल करने के आरोप भी लगे। मूल विभाग में वापस भेज दिया गया था बेलचंदन पर लगे आरोपों के बाद उनके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर वे लगातार स्थगन आदेश लेते रहे, इसके बाद 23 जनवरी 2024 को हाईकोर्ट के आदेश (याचिका क्रमांक 3459/2017) के बाद उन्हें उनके मूल विभाग बॉर्डर रोड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन में वापस भेज दिया गया था। लगभग 7 सालों तक स्टे के आधार पर विवादित अधिकारी मंडल में जमे रहे। मूल विभाग जाने को तैयार नहीं थे बेलचंदन बेलचंदन की प्रतिनियुक्ति नवंबर 2015 में ही समाप्त हो चुकी थी, लेकिन वे अपने मूल विभाग बीआरओ वापस जाने को तैयार नहीं थे। कई शिकायतों और प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने के कारण शासन और मंडल आयुक्त ने उन्हें मूल विभाग में जाने के लिए वर्ष 2017 में भारमुक्त कर दिया था। जिले के कलेक्टर ने भी उनको हटाने के लिए शासन को ज्ञापन दिया था। इससे जुड़ी खबर यहां पढ़े… एग्जीक्यूटिव इंजीनियर चंद्रशेखर बेलचंदन की पिटिशन खारिज:हाईकोर्ट ने प्रतिनियुक्ति पर स्टे रखने से किया इनकार; अब मूल विभाग जाना होगा वापस राजनांदगांव जिले के हाउसिंग बोर्ड के कार्यपालन अभियंता चंद्रशेखर बेलचंदन को वापस अपने मूल विभाग जाना होगा। उन्होंने अपनी प्रतिनियुक्ति को न्यायालय में चुनौती दी थी। पिछले 7 सालों से उनकी प्रतिनियुक्ति पर स्टे लगा हुआ था, लेकिन आखिरकार वे बिलासपुर हाईकोर्ट में अपने पक्ष को रख पाने में नाकामयाब हुए। पढ़ें पूरी खबर…

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