विश्वकर्मा जयंती पर सुथार समाज का भव्य आयोजन:मंदिर में पूजा के बाद शोभायात्रा, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल

शहर के सुथारवास स्थित भगवान विश्वकर्मा मंदिर में देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समाज के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आरंभ सुबह 7 बजे जाजम और पाठ स्थापना के साथ हुआ। इसमें विश्वकर्मा वंश सुथार मंदिर कमेटी के सदस्य और समाज के कई लोग शामिल हुए। विश्वकर्मा वंश सुथार मंदिर कमेटी के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पी माना जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा से रोजगार और व्यापार में वृद्धि होती है। इस अवसर पर समाज के लोगों ने अपने घरों, प्रतिष्ठानों और फैक्ट्रियों में भी हवन-पूजा कर प्रसाद वितरित किया। विश्वकर्मा मंदिर और उसके परिसर के साथ-साथ आसपास की गलियों को भी फूलों और विद्युत लड़ियों से सजाया गया था। भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया गया। कार्यक्रम में यज्ञ-पूजन के बाद आरती की गई और लोक कल्याण की प्रार्थना की गई। अलसुबह से ही समाज बंधुओं के साथ अन्य समाजों के लोगों ने भी दर्शन किए। इस अवसर पर महाप्रसादी का भी आयोजन किया गया।
पूजा-अर्चना के बाद मंदिर परिसर से भगवान विश्वकर्मा की एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई। ढोल-धमाकों, डीजे और बैंड-बाजे के साथ यह शोभायात्रा नगर भ्रमण पर निकली। शोभायात्रा में समाज बंधु उत्साहपूर्वक जयकारे लगाते हुए आराध्य देव की भक्ति में लीन होकर नाचते-गाते चल रहे थे। शोभायात्रा ने लगभग दो घंटे से अधिक समय तक शहर का भ्रमण किया और फिर मंदिर परिसर लौट आई। शोभायात्रा में श्रद्धालुओं और समाज के युवाओं ने भगवान विश्वकर्मा की पालकी को अपने कंधों पर उठाया हुआ था। रथनुमा झांकियों में भगवान की विभिन्न भाव-मुद्राओं वाली प्रतिमाएं विराजमान थीं, जिन्हें देखने के लिए शहरवासी उमड़ पड़े। शोभायात्रा में समाज की महिलाएं और पुरुष नाचते-गाते हुए उत्साह से जयकारे लगा रहे थे। शाम को मंदिर में एक विशेष संध्या आरती का भी आयोजन किया गया। इस आयोजन को सफल बनाने में कमेटी अध्यक्ष लक्ष्मण लाल, सचिव चंपकलाल, कोषाध्यक्ष रमेश कुमार, उपाध्यक्ष अचलाराम, सहसचिव किशोर कुमार और सह-कोषाध्यक्ष वीसाराम सहित समाज के कई प्रबुद्ध नागरिकों का विशेष सहयोग रहा।

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