गोलक | सरायकेला विश्व जल दिवस पर जल के संरक्षण का संकल्प लेने की आवश्यकता है, क्योंकि भूगर्भ से जलस्तर काफी तेजी से नीचे जा रहा है और कुछ ही वर्षों में यह जल हमारी पहुंच से दूर हो सकता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सरायकेला-खरसावां जिले में वर्तमान में औसतन 16 से 17 मीटर पर भूजल स्तर उपलब्ध है और प्रत्येक वर्ष एक फीट भूजल स्तर नीचे की ओर सरक रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हम अपनी आने वाले पीढ़ी के लिए अगर जल का संचयन न करें तो बूंद-बूंद पानी के लिए वे तरस जाएंगे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सरायकेला- खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत पूरे गम्हरिया प्रखंड, राजनगर और सरायकेला के कुछ हिस्सों में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है। इसमें आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में भूजल स्तर सबसे नीचे है। इस मामले में मालूम हो िक आदित्यपुर में कहीं-कहीं तो 900 से 1000 फीट की बोरिंग भी सफल नहीं हो पा रही है। इधर, नगर क्षेत्र में ताबड़तोड़ बोरिंग और डीप बोरिंग भी जारी है, जिसके कारण भूजल स्तर पर गहरा असर पड़ रहा है। जल संरक्षण को लेकर अब नहीं जागेंगे तो कब : जिले में भूमिगत जल की स्थिति को लेकर पेयजल व स्वच्छता विभाग द्वारा लगातार जन जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके बावजूद आम जनमानस प्रकृति द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराए गए जल के संरक्षण को लेकर प्राय: उदासीनता िदख रहा है। पेयजल व स्वच्छता विभाग सरायकेला प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता जैसन होरो बताते हैं कि प्रत्येक वर्ष गर्मी के दिनों में भूमिगत जलस्तर तकरीबन 8 से 10 इंच नीचे जा रहा है। आदित्यपुर व गम्हरिया क्षेत्र में 800 से 900 फीट पर भी पानी नहीं मिल रहा है, जहां जल सबसे अधिक गहराई में होने के कारण वहां डैम से सप्लाई पानी ही संभव है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले में जलस्तर 16 से 17 मीटर पर उपलब्ध है। और जिले भर में कुल 15769 चापाकल क्रियाशील हैं। उन्होंने कहा कि आगामी गर्मी के मौसम को देखते हुए चापाकल मरम्मत के लिए टीम का गठन किया गया है।


