विश्व वेटलैंड दिवस:इसरो ने सैटेलाइट से खोजा था जोधपुर झाल वेटलैंड, अब बना हजारों पक्षियों का सुरक्षित ठिकाना

जिस वेटलैंड को सैटेलाइट से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( इसरो) ने ढूंढा था। वहां जल्द पर्यटकों 2026 के आने वाले पर्यटन सीजन में तीसरी बर्ड सेंचुरी जोधपुर झाल में मिलने जा रही है। विश्व प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घना पक्षी विहार) से लगभग 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित 80 हैक्टेयर में फैला जोधपुर झाल क्षेत्र अब धीरे-धीरे प्रवासी पक्षियों के लिए एक नए वेटलैंड के रूप में विकसित हो रहा है। जहां इस वर्ष पर्यटन सीजन शुरू होने पर जोधपुर बर्ड सेंचुरी घूमने का मौका पर्यटकों को मिलेगा। इकोलॉजिस्ट डॉ.केपी सिंह बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बेहतर हुई है, जिसके चलते सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में विदेशी व देशी पक्षियों का आगमन बढ़ा है। यहां पर सारस, पेंटेड स्टॉर्क, नीलसर, कॉमन टील, ब्राह्मणी बतख समेत कई 210 प्रजाती के जलपक्षी देखे जा चुके हैं। वर्ष 2026-27 में एशिनयन वाटरबर्ड सेंसस-26 के तहत हुई गणना में 72 प्रजातियों के 1493 पक्षी मिले हैं, इसमें 11 संकटग्रस्त प्रजातियां पाई गईं थी। केवलादेव पक्षी विहार में प्रवासी पक्षियों के लिए 29 वर्ग किलोमीटर में फैला सुरक्षित वेटलैंड माना जाता है। हर वर्ष सर्दियों के मौसम में एशिया, यूरोप और साइबेरिया जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से हजारों पक्षी यहां पहुंचते हैं। जहां उन्हें वेटलैंड अपनी प्राकृतिक झीलों, घास के मैदानों और दलदली क्षेत्रों के कारण पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है,लेकिन उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की मथुरा, आगरा और भरतपुर के मध्य जोधपुर झाल को बर्ड सेंचुरी के रूप में विकसित कर रहे हैं, जिससे आगे चल कर पर्यटकों को 40 किलोमीटर के दायरे में आगरा में सूर सरोवर बर्ड सेंचुरी, जोधपुर झाल बर्ड सेंचुरी और केवलादेव बर्ड सेंचुरी पर्यटकों को देखने के लिए मिलेगी। 65 हैक्टेयर में बनकर तैयार होने वाली जोधपुर झाल बर्ड सेंचुरी में लगभग सिविल वर्क पूरा हो चुका है। जहां टिकिट विंडों, कैंटीन, शौचालय, गेस्ट हाउस, इंटरप्रिटेशन सेंटर,कच्ची ड्रेल 8 वॉटर बॉडी तैयार की गई हैं। इसके अलावा 5 हैक्टेयर में जंगल भी पक्षियों के लिए तैयार किया जा रहा है। बीआरडीएस के ईकोलॉजिस्ट डॉ. केपी सिंह बताते हैं कि बरसात के समय पानी एकत्रित होने व घास होने से जमीन में नमी आने लगी थी। जिस कारण यहां प्रवासी पक्षी को अच्छा हैबिटेट मिलने लगा था। इस जगह को कई वर्ष पहले इसरो ने सैटेलाइट से सर्च कर वेटलैंड कोड दिया। 2009 के समय कांग्रेस सरकार में ढाई हैक्टेयर से अधिक लैंड पर वेटलैंड होने पर सर्च करने को कहा था। केंद्र सरकार ने यह जिम्मेदारी इसरो को दे रखी थी, जिसको इसरो के द्वारा सैटेलाइट माध्यम से सर्च किया था और वेटलैंड कोड दिया गया था। जिसके बाद हमने यहां आने वाले देसी-विदेशी पक्षियों की गिनती करना शुरू कर दी थी,जिसके बाद बृज क्षेत्र विकास परिषद ने यहां बर्ड सेंचुरी बनाने की घोषणा की थी। यहां 2 वेटलैंड है, फीडर वेटलैंड व स्टॉप ओवर वेटलैंड । प्रवासी पक्षी केवलादेव जाने से यहां रुकते फिर केवलादेव जाते हैं।

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