वीणाओं की तान और लोक संगीत ने किया मंत्रमुग्ध:जवाहर कला केंद्र के स्थापना दिवस पर सुर, लय और भावना का अद्भुत संगम, पं. विश्वमोहन भट्ट ने बटोरी तालियां

जवाहर कला केंद्र के स्थापना दिवस पर आयोजित संगीत संध्या में श्रोताओं ने सुरों और लोक गीतों का ऐसा अद्वितीय संगम देखा, जिसने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। मध्यवर्ती ओपन एयर थिएटर में आयोजित इस सांगीतिक समारोह में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त ग्रैमी अवॉर्ड विजेता पद्म भूषण पंडित विश्व मोहन भट्ट और तंत्री सम्राट पंडित सलिल भट्ट ने अपनी मोहन वीणा और सात्विक वीणा की जुगलबंदी से ऐसा अद्भुत माहौल रचा, जिसने संगीतप्रेमियों के हृदय को छू लिया। कार्यक्रम की शुरुआत राजस्थान की आत्मा से जुड़े लोक गीत “केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देस” से हुई, जिसने दर्शकों को सांस्कृतिक गरिमा से जोड़ दिया। इसके बाद राग कीरवानी में ‘हिचकी’ लोक रचना प्रस्तुत की गई, जिसे खूब सराहा गया। देस राग पर आधारित ‘बालम जी म्हारा झिरमिर बरसे मेह’ की रचना ने भी खूब तालियाँ बटोरी। विशेष आकर्षण पंडित विश्व मोहन भट्ट का ग्रैमी पुरस्कार प्राप्त एल्बम ए मीटिंग बाय द रिवरकी रचना रही, जो राग जोग पर आधारित थी। वहीं ‘हेलो म्हारो सुनो’ की आध्यात्मिक रचना को राग बागेश्वरी के भावपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत कर श्रोताओं को एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव दिया गया। कार्यक्रम का समापन ‘वंदे मातरम’ के सशक्त और भावपूर्ण वादन के साथ हुआ, जिसे पंडित विश्व मोहन भट्ट और पंडित सलिल भट्ट ने संयुक्त रूप से प्रस्तुत किया। वीणाओं का वैभव और तबले की थाप
मोहन वीणा के जनक पंडित विश्व मोहन भट्ट और सात्विक वीणा के रचयिता पंडित सलिल भट्ट ने अपनी तंत्री साधना के माधुर्य से ऐसा सात्विक वातावरण रचा, जिसमें हर श्रोता जैसे खो सा गया। पंडित हिमांशु महंत ने अपने तबला वादन में तीन ताल, केहरवा और दादरा तालों के लयात्मक समन्वय से दर्शकों को संगीत की लयात्मक यात्रा पर ले गए। उनका वादन अपने आप में एक अनुभव बन गया। लोक संगीत के जादू को मंच पर उस्ताद अनवर खान मांगणियार ने जीवंत किया। जिनके स्वर में राजस्थानी माटी की खुशबू और आत्मा की गहराई दोनों स्पष्ट झलकती है। उनके साथ कूटला खान, गोराम खान और सवाई गाजी खान ने करताल और ढोलक वादन से माहौल में और भी रंग भर दिए। पानी बचाने के संदेश के साथ खुलीं बाल मन की परतें एनएसडी से प्रशिक्षित निर्देशिका इप्सिता चक्रवर्ती सिंह के निर्देशन में हुई नाट्य प्रस्तुति ‘मिराज मेलोडीज’ में बाल मन की गुत्थियों को सुलझाते हुए पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। मिराज मेलोडीज एक बाल नाटक है, जो नील नामक एक बालक की रोमांचक यात्रा को प्रस्तुत करता है। नील एक सपनों की दुनिया में पहुंचता है, जहाँ पानी दुर्लभ है। वहाँ उसकी मुलाकात ओनी नामक एक दूसरी दुनिया की लड़की से होती है। दोनों को पता चलता है कि इस दुनिया में पानी नहीं है और लोग आंसू पीकर जीते हैं। यहीं से नील और ओनी इस संकट का समाधान ढूंढ़ने की यात्रा पर निकलते हैं, ताकि इस सूखाग्रस्त भूमि में आशा ला सकें। जैसे-जैसे वे इस रहस्यमयी दुनिया के अद्भुत परिदृश्यों से होकर गुजरते हैं, उन्हें असाधारण चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। नाटक के माध्यम से पानी बचाने का बड़ा संदेश मनोरंजक अंदाज में दिया गया जिसे दर्शकों की भरपूर सराहना मिली।

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